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Lung Cancer: फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ स्मोकर्स तक सीमित नहीं, खतरा सब पर मंडरा रहा है!

Lung Cancer: अब फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रहा। वायु प्रदूषण, सेकेंड हैंड स्मोक और खराब लाइफस्टाइल के चलते नॉन-स्मोकर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैं और सबसे मुश्किल है इसकी पहचान।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Aug 02, 2025 पर 5:23 PM
Lung Cancer: फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ स्मोकर्स तक सीमित नहीं, खतरा सब पर मंडरा रहा है!

सोचिए… आप कभी स्मोकिंग नहीं करते, हेल्दी भी खाते हैं फिर भी एक दिन सांस लेने में तकलीफ होती है, वजन अचानक गिरने लगता है, और जांच के बाद पता चलता है कि आपको फेफड़ों का कैंसर है। यह सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि आज हर दूसरा फेफड़ों से जुड़ी बीमारी का मरीज नॉन-स्मोकर है।

आखिर क्यों बढ़ रहा फेफड़ों में कैंसर?

हम रोज जो हवा सांस में भरते हैं, उसमें छिपे होते हैं PM2.5 जैसे बारीक जहर ये न सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि जीन में बदलाव कर कैंसर तक की वजह बन सकते हैं। गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्री की गैस, किचन का धुआं ये सब अब साइलेंट स्मोक बन चुके हैं। आपको पता भी नहीं चलता और आपकी सांसें कमजोर होती जाती हैं।

सेकेंड हैंड स्मोक यानी जब आपके आसपास कोई धूम्रपान करता है और आप उसका धुआं सांस में लेते हैं , ये धूम्रपान काफी खतरनाक होता है। और थर्ड हैंड स्मोक वो है जिसमें धुएं की खुशबू कपड़ों, पर्दों और दीवारों में रह जाती है वो भी काफी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ लोगों के शरीर में ऐसे जीन होते हैं जो बिना किसी स्मोकिंग के भी कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं। खासतौर पर एशियाई महिलाओं में ये ज्यादा देखा गया है। अच्छी बात ये है कि ऐसे मरीजों पर टार्गेटेड दवाएं बेहतर असर करती हैं।

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण ?

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