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Aditya L1 Mission: अंतरिक्ष में जिस तूफान ने तबाह की मस्क की सैटेलाइट, उसी जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म का अध्ययन करेगा आदित्या-एल1

Aditya L1 Mission: सूर्य पर होने वाले ये विशाल विस्फोट भारी मात्रा में एनर्जी पैदा करते हैंस जो साढ़े 10 लाख km दूर पृथ्वी पर रेडियो ट्रांसमिशन और GPS कॉर्डिनेट्स को प्रभावित कर सकते हैं। ये बड़े पैमाने पर इजेक्शन हैं, जिनका अध्ययन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए मिशन आदित्य-एल1 के प्राइमरी पेलोड की तरफ से किया जाना है। विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) नाम के पेलोड को बेंगलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) ने डेवलप किया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 01, 2023 पर 3:55 PM
Aditya L1 Mission: अंतरिक्ष में जिस तूफान ने तबाह की मस्क की सैटेलाइट, उसी जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म का अध्ययन करेगा आदित्या-एल1
Aditya L1 Mission: जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म का अध्ययन करेगा आदित्या-एल1

Aditya L1 Mission: 2022 की शुरुआत में, सूरज से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejection) के कारण पैदा हुए जियोमैग्नेटिक तूफान (Geomagnetic Storm) ने 49 स्पेसएक्स स्टारलिंक सैटेलाइट (SpaceX Starlink satellites) में से 40 को नष्ट कर दिया था। सूर्य पर होने वाले ये विशाल विस्फोट भारी मात्रा में एनर्जी पैदा करते हैंस जो साढ़े 10 लाख km दूर पृथ्वी पर रेडियो ट्रांसमिशन और GPS कॉर्डिनेट्स को प्रभावित कर सकते हैं। ये बड़े पैमाने पर इजेक्शन हैं, जिनका अध्ययन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए मिशन आदित्य-एल1 के प्राइमरी पेलोड की तरफ से किया जाना है। विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) नाम के पेलोड को बेंगलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) ने डेवलप किया था।

IIA की डायरेक्टर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने Moneycontrol को बताया, "CME के दौरान निकलने वाले सोलर मास की तीव्रता के आधार पर, अंतरिक्ष का मौसम प्रभावित होता है।"

उन्होंने कहा, "सवाल ये है कि सूर्य अंतरिक्ष में चीजों को कितना प्रभावित करता है, क्योंकि हम GPS, मोबाइल कनेक्टिविटी इत्यादि जैसी स्पेस टेक्नोलॉजी पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर हैं।"

Aditya-L1 को सात पेलोड के साथ भेजा जाएगा, जिसमें IIA का पेलोड भी शामिल है। इसे 2 सितंबर को PSLV-C57 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाना है। ये मिशन चंद्रमा के पास 24 अगस्त को दक्षिणी ध्रुव पर ISRO की चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के ठीक बाद आया है।

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