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BR Ambedkar Death Anniversary: डॉ. बाबा साहब की पुण्यतिथि आज, ये विचार युवाओं के लिए हैं प्रेरणादायक

BR Ambedkar Death Anniversary: संविधान के जनक डॉ. भीमराव अंबेडकर की आज पुण्यतिथि है। हर साल 06 दिसंबर के दिन बाबा साहब अम्बेडकर को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी पुण्यतिथि पर महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। उनकी बातें आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 06, 2022 पर 10:34 AM
BR Ambedkar Death Anniversary: डॉ. बाबा साहब की पुण्यतिथि आज, ये विचार युवाओं के लिए हैं प्रेरणादायक
बाबा साहब अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में ‘द बुद्धा एंड हिज धर्मा’ किताब लिख रहे थे।

BR Ambedkar Death Anniversary: डॉक्टर भीमराव रामजी अम्बेडकर, जिन्हें हम सब डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से भी जानते हैं। डॉक्टर अम्बेडकर को संविधान का जनक कहा जाता है। 06 दिसंबर 1956 को उनकी मृत्यु हुई थी। हर साल 06 दिसंबर के दिन को बाबा साहेब की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके निधन के बाद उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का काम उनके अनुयायियों के अलावा परिवार की अगली पीढ़ियों ने भी बढ़ाने का काम किया। एक कानून के विशेषज्ञ, अर्थशास्त्र के ज्ञाता, संविधान निर्माता के अलावा उन्हें दलितों का उद्धार करने वाला मसीहा माना जाता है।

महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर बाबा साहेब को सम्मान और श्रद्धांजलि दी जाती है। भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं और अंतिम संतान थे। उनका मराठी मूल का परिवार महाराष्ट्र रत्नागिरी जि लेके आंबडवे गांव का था। वे हिंदूओं में अछूत माने जाने वाली महार जाति के थे।

अंबेडकर का सफर

भीमराव को बचपन से ही घोर भेदभाव और सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ा था। जिसे सहन करने के बाद भी उन्होंने ना सिर्फ समाज में अपना स्थान बनाया, बल्कि दलित और शोषित समाज के उत्थान के लिए पूरे समर्पित भाव से काम किया। भीम राव विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे। जब वो 1926 में भारत आए तब उन्हें मुंबई की विधान सभा का सदस्य चुना गया। वह आजाद देश के पहले कानून मंत्री बने। साल 1990 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। साल 1956 में अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था। परिनिर्वाण बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धांतों और लक्ष्यों में से एक है।

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