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देश में बढ़ी गर्मी जानें इकोनॉमी पर हीट वेव की तपिश का क्या होता है असर

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक जलाशयों का घटते स्तर से पीने के पानी और खेती के लिए पानी की जरूरत पर असर पड़ सकता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी पर असर के साथ मंहगाई पर भी असर डाल सकता है। रिसर्च फर्म क्वांटईको के विवेक कुमार को लगता है कि एक महीने के भीतर सब्जियों की कीमतें बढ़ जाएंगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 11, 2024 पर 1:04 PM
देश में बढ़ी गर्मी जानें इकोनॉमी पर हीट वेव की तपिश का क्या होता है असर
मौसम विभाग के मुताबिक हीटवेव की घोषणा आमतौर पर तब की जाती है जब तापमान वर्ष के उस समय के सामान्य तापमान से 4.5-6 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है

भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department (IMD) ने अप्रैल से जून तक अत्यधिक गर्मी की भविष्यवाणी की है। इसका खामियाजा मध्य और पश्चिमी प्रायद्वीपीय भागों को भुगतना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के युग में और गर्म लहरें नई सामान्य बात (new normal) बन गई हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना कमजोर हो सकता है? ध्यान रखें कि इसका असर भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर विशेष रूप से भारी पड़ता है। जो असंगत रूप से बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करती है।

जैसा कि देश भीषण गर्मी के लिए तैयार है। नीति निर्माताओं (policymakers) के सामने अपरिहार्य चुनौती भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना है। IMF के मुताबिक 45.76 प्रतिशत मजदूर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में लगे हुए है। जबकि असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत है। वास्तव में International Monetary Fund ने कहा कि 92.4 प्रतिशत मजदूर अनौपचारिक सेक्टर में लगे हुए हैं।

स्वास्थ्य के साथ ही पीने और खेती की पानी की हो सकती है किल्लत

सामान्य से अधिक तापमान के कई प्रभाव हो सकते हैं। पहला और शायद सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर इसमें स्वास्थ्य का होता है। जितने मजदूर विभिन्न सेक्टर में काम करते हैं उसका एक बड़ा हिस्सा खुले में काम करता है।

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