Get App

Gyanvapi Mosque Dispute: ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं

Gyanvapi Mosque Dispute: हिंदू पक्ष ने उस जगह पर मंदिर बहाल करने की मांग की है जहां मौजूदा समय में ज्ञानवापी मस्जिद स्थित है। हिंदू पक्ष के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद, मंदिर का हिस्सा है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की दलील है कि इस मुकदमे की पूजा स्थल अधिनियम (विशेष प्रावधान) 1991 के तहत सुनवाई नहीं हो सकती है

Akhileshअपडेटेड Dec 19, 2023 पर 11:06 AM
Gyanvapi Mosque Dispute: ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं
Gyanvapi Mosque Dispute: अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की सभी पांच याचिकाओं को खारिज कर दिया है (PHOTO-PTI)

Gyanvapi Mosque Dispute: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर के बीच स्वामित्व को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की सभी याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी और अन्य की सभी पांच याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिका में वाराणसी की अदालत के 8 अप्रैल 2021 के उस निर्देश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद का समग्र सर्वे कराने का निर्देश दिया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, "यह फैसला ऐतिहासिक फैसला है क्योंकि सभी पक्षों को यह कहा गया है कि मामले को 6 महीने में निस्तारित किया जाए और याचिकाओं को खारिज किया है... अगर एक पक्ष पीड़ित है तो उसके लिए ऊपर की अदालत खुली है।" इससे पहले 8 दिसंबर को जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने याचिकाकर्ता अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और प्रतिवादी मंदिर पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

हिंदू पक्ष ने उस जगह पर मंदिर बहाल करने की मांग की है जहां मौजूदा समय में ज्ञानवापी मस्जिद स्थित है। हिंदू पक्ष के मुताबिक, ज्ञानवापी मस्जिद, मंदिर का हिस्सा है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की दलील है कि इस मुकदमे की पूजा स्थल अधिनियम (विशेष प्रावधान) 1991 के तहत सुनवाई नहीं हो सकती है। इस कानून में कहा गया है कि किसी भी धर्म के पूजा स्थल का जो अस्तित्व 15 अगस्त 1947 के दिन था, वही बाद में भी रहेगा।

सर्वे रिपोर्ट अदालत में दाखिल

सब समाचार

+ और भी पढ़ें