लोकसभा चुनाव से पहले बिहार महागठबंधन में दरार पड़ती नजर आ रही है। बिहार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री संतोष सुमन (Santosh Suman) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के मंत्रिमंडल से मंगलवार को अचानक इस्तीफा दे दिया। उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। संतोष सुमन बिहार पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jiram Ram Manjhi) के बेटे हैं। वह नीतीश सरकार में एससी एवं एसटी कल्याण विभाग संभाल रहे थे। मीडिया से बातचीत में संतोष सुमन ने दावा किया कि सीएम नीतीश कुमार चाहते थे कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) का विलय जनता दल यूनाइटेड (JDU) में हो जाए जो उन्हें मंजूर नहीं था इसीलिए उन्होंने नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया है।
संतोष सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जिसकी स्थापना उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने की थी। अभी यह पता नहीं चल सका है कि संतोष सुमन का इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं।
हालांकि, संतोष के इस्तीफे से नीतीश कुमार सरकार पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन के सूत्रों ने बताया कि अगर चार विधायकों वाली HAM गठबंधन से बाहर हो भी जाती है, तो इससे सरकार के अस्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बिहार सरकार में अपने मंत्रीपद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने कहा कि हमारी पार्टी का अस्तित्व खतरे में था उसको बचाने के लिए हमने ये कदम उठाया है। मैं महागठबंधन आज भी रहना चाहता हूं। अभी मैंने ऐसा (NDA में शामिल होने की बात) कुछ नहीं सोचा है।
यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी 23 जून को पटना में होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक में भाग लेगी। इस उन्होंने कहा, "जब हमें एक पार्टी के रूप में मान्यता भी नहीं मिली है, तो हमें कैसे आमंत्रित किया गया होगा?"
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल-यूनाइटेड (JDU) के नेता नीतीश कुमार ने पिछले साल अगस्त में बीजेपी से नाता तोड़ लिया और राज्यपाल फागू चौहान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने आठवीं बार RJD के समर्थन से बिहार के सीएम के रूप में शपथ ली।
243 सदस्यीय राज्य विधानसभा में मांझी के हम के चार विधायक हैं। सुमन के पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी पार्टी के विधायकों के साथ 8 जून की शाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे के फॉर्मूले सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मांझी ने इससे पहले आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में पांच सीटों की मांग की थी।