पीएम मोदी के सपोर्ट में अरबपति कारोबारी Gautam Adani ने चीन को चुनौती दी, जानिए कैसे!

Gautam Adani : श्रीलंका 1948 में मिली आजादी के बाद के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहीं भारत इस आइलैंड देश में सामरिक संतुलन स्थापित करने की कोशिश में है। खास बात यह है कि श्रीलंका प्रमुख ग्लोबल शिपिंग लेन्स में आता है और भारत को डर है कि उसका एशियाई प्रतिद्वंद्वी चीन उसकी घेराबंदी में श्रीलंका को इस्तेमाल कर सकता है

अपडेटेड Nov 11, 2022 पर 4:30 PM
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75 करोड़ डॉलर की कोलंबो पोर्ट डील के कुछ महीने बाद, बीते साल अक्टूबर में गौतम अडानी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच “मजबूत संबंधों” की बात कही थी

Gautam Adani  : उत्तर श्रीलंका का पूनरिन इलाका भारत के दक्षिणी छोर से काफी दूर स्थित है। भारत के सबसे अमीर शख्स गौतम अडानी यहां पर रिन्युबिल पावर प्लांट्स विकसित कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स के चलते अडानी एक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में आ सकते हैं। अडानी एशिया के सबसे अमीर शख्स हैं और इसी साल उन्होंने एमेजॉन के मालिक जेफ बेजोस की भी पीछे छोड़ दिया है। श्रीलंका 1948 में मिली आजादी के बाद के सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहीं भारत इस आइलैंड देश में सामरिक संतुलन स्थापित करने की कोशिश में है, जो फिलहाल चीन के पक्ष में नजर आ रहा है। खास बात यह है कि श्रीलंका प्रमुख ग्लोबल शिपिंग लेन्स में आता है और भारत को डर है कि उसका एशियाई प्रतिद्वंद्वी चीन उसकी घेराबंदी में श्रीलंका को इस्तेमाल कर सकता है।

श्रीलंका के कुछ लॉमेकर्स की आशंकाओं को सरकार ने किया खारिज

इस मोर्चे पर अडानी सबसे आगे नजर आ रहे हैं, जो लंबे समय से भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के सपोर्टर रहे हैं। श्रीलंका के कुछ लॉमेकर्स ने उन पर कुछ अपारदर्शी पोर्ट और एनर्जी डील करने का आरोप लगाया। हालांकि, बाद में कहा कि यह निवेश श्रीलंका की जरूरतों को पूरा करते हैं।


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137 अरब डॉलर की दौलत के मालिक अडानी के बिजनेस एम्पायर में पोर्ट्स, कोयला प्लांट्स, पावर जेनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन आते हैं। भले ही उनका ज्यादातर बिजनेस भारत में है, लेकिन वह धीरे-धीरे दूसरे में निवेश कर रहे हैं। वहीं, दूसरे देश भी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए उनसे संपर्क कर रहे हैं।

किन देशों में अडानी को मिल सकती है सफलता

इन कदमों और मोदी सरकार से अडानी की नजदीकियों के चलते चीन के खिलाफ भारत की कोशिशों में यह बिजनेस टायकून खासा अहम हो सकता है।

होनोलूलू में पैसिफिक फोरम रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक रिसर्च फेलो अखिल रमेश ने कहा, उन देशों में अडानी को अच्छी सफलता मिल सकती है जिनसे चीन सरकार की तुलना में भारत सरकार के अच्छे संबंध हैं। वहीं, जहां पर अपने पड़ोसी की तुलना में भारत की पकड़ कमजोर है, वहां अडानी का इनवेस्टमेंट चीन की सरकारी कंपनियों को टक्कर दे सकता है। इनमें, श्रीलंका और इजरायल जैसे देश आते हैं।

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श्रीलंका में आमने-सामने आ गए हैं भारत-चीन

इस क्रम में श्रीलंका में सबसे ज्यादा तनाव दिख रहा है। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, कई भारतीय और श्रीलंका के अधिकारियों ने मुश्किलों से जूझ रहे श्रीलंका में अडानी के निवेश को मोदी सरकार के एजेंडे को बढ़ाने की कोशिश के रूप में बताया। वहीं, अडानी के पोर्ट, पावर और सीमेंट जैसे बिजनेस सरकार की घरेलू आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप नजर आते हैं। अडानी लगातार मोदी सरकार से उनकी कंपनियों को विशेष तरजीह मिलने की बात से इनकार करते रहे हैं।

राष्ट्रपति से मिले थे अडानी

75 करोड़ डॉलर की कोलंबो पोर्ट डील के कुछ महीने बाद, बीते साल अक्टूबर में अडानी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच “मजबूत संबंधों” की बात कही थी। यह श्रीलंका में भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट का दुर्लभ उदाहरण है, क्योंकि इससे पहले चीन बेल्ड एंड रोड प्रोजेक्ट के जरिए वहां हाईवेज से पोर्ट तक तमाम प्रोजेक्ट्स में निवेश करता रहा था।

अडानी ने चीन से छीना कौन सा प्रोजेक्ट

इस मीटिंग के तुरंत बाद अडानी ग्रुप की एक टीम ने उत्तरी श्रीलंका का दौरान किया, जो ग्रीन एनर्जी में 70 अरब डॉलर के निवेश के लक्ष्य पर काम कर रही थी। यह विजिट खासी अहम रही। कुछ समय बाद राजपक्षे सरकार ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए चायनीज सोलर प्रोजेक्ट्स टर्मिनेट कर दिए।

2022 की शुरुआत में अडानी ने बिना सुर्खियां बटोरे पूनेरिन और मन्नार में 500 मेगावाट के रिन्युएबिल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते किए। कई महीने के बाद इस समझौते की पुष्टि की गई।

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