'भक्त कभी उनके पैर नहीं छूते': 'चरण रज' पर आया भोले बाबा के वकील का बयान, पढ़ें- अब तक की बड़ी बातें
Hathras stampede: हाथरस में मंगलवार 2 जुलाई को आयोजित सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई। भगदड़ तब हुई जब बड़ी संख्या में उनके अनुयायी बाबा नारायण हरि उर्फ साकार विश्व हरि भोले बाबा की ओर उनके "चरण रज" यानी उनके पैरों के आसपास की मिट्टी लेने के लिए दौड़े
'भगदड़ के पीछे असामाजिक तत्वों का हाथ' हाथरस कांड पर पहली बार आया 'भोले बाबा' का बयान
Hathras stampede: हाथरस भगदड़ के एक दिन बाद प्रवचनकर्ता भोले बाबा के वकील ने बुधवार (3 जुलाई) को दावा किया कि अनुयायी कभी भी उनके पैर नहीं छूते हैं। उन्होंने हाथरस में मंगलवार को आयोजित सत्संग में मची भगदड़ और 121 लोगों के मारे जाने के पीछे कुछ असामाजिक तत्वों का हाथ होने का संदेह जताया है। प्रवचनकर्ता भोले बाबा के वकील ए. पी. सिंह ने कहा कि मंगलवार की भगदड़ की जांच कर रहे राज्य प्रशासन और पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए भी वे तैयार हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। बाबा नारायण हरि को साकार विश्व हरि भोले बाबा के नाम से भी जाना जाता है।
सिंह का यह बयान प्रारंभिक सरकारी रिपोर्ट के विपरीत है, जिसमें दावा किया गया है कि भगदड़ तब मची जब बड़ी संख्या में अनुयायी प्रवचनकर्ता भोले बाबा को करीब से देखने और उनके 'चरण रज' इकट्ठा करने के लिए उनके पास पहुंचे जिनमें अधिकतर महिलाएं थीं।
सिंह ने पीटीआई को दावा किया, "कुछ असामाजिक तत्वों ने साजिश रची। जब नारायण साकार हरि कार्यक्रम स्थल से चले गए, उनके वाहन चले गए, तो हमारे स्वयंसेवक और अनुयायी साजिश के कारण यह समझने में विफल रहे कि क्या हो रहा है। यह एक योजना के तहत किया गया था और इसकी जांच होनी चाहिए।"
उन्होंने कहा कि भोले बाबा भी मंगलवार की भगदड़ की जांच कर रहे राज्य प्रशासन और पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं और उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। FIR में किए गए दावों और स्थानीय उप जिलाधिकारी द्वारा तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर सुप्रीम कोर्ट के वकील सिंह ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा, "नारायण साकार हरि के पैर उनके अनुयायी कभी नहीं छूते। 'चरण रज' का उल्लेख भी झूठा है। इस तरह के कृत्य का कभी कोई वीडियो या तस्वीर नहीं है।"
FIR में भोले बाबा का नाम नहीं
सिंह ने कहा कि वह बाबा भोले और सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र के पुलराई गांव में आयोजित सत्संग के मुख्य आयोजक का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भगदड़ के सिलसिले में दर्ज FIR में प्रवचनकर्ता भोले बाबा का नाम आरोपी के तौर पर नहीं है।
अगले कानूनी कदम के बारे में सिंह ने कहा, "हम घटनास्थल का दौरा करेंगे, अन्य कारकों पर विचार करेंगे और उसके अनुसार निर्णय लेंगे। उनके (भोले बाबा) कार्यक्रमों के दौरान, नक्शे बनाए जाते हैं, अनुमति ली जाती है और पर्याप्त क्षेत्र में पर्याप्त व्यवस्था की जाती है।"
सिंह ने कहा कि भोले बाबा ने उनके सत्संग के बाद जो कुछ हुआ उसकी निंदा की है। उन्होंने दावा किया कि प्रवचनकर्ता के सेवादार और अनुयायी भगदड़ के पीड़ितों की मदद कर रहे हैं और उन्हें भोजन और दवाइयां मुहैया करा रहे हैं।
अब तक की बड़ी बातें
- एक प्रारंभिक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भगदड़ तब हुई जब बड़ी संख्या में उनके अनुयायी बाबा नारायण हरि उर्फ साकार विश्व हरि भोले बाबा की ओर उनके "चरण रज" यानी उनके पैरों के आसपास की मिट्टी लेने के लिए दौड़े। हालांकि, उनके वकील एपी सिंह ने कहा कि भगदड़ कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा रची गई साजिश के कारण हुई।
- पुलिस ने घटना पर दर्ज एफआईआर में भोले बाबा को आरोपी नहीं बनाया है। पुलिस ने कहा कि भोले बाबा उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में अपने विशाल आश्रम में मौजूद नहीं थे। मैनपुरी के डीएसपी सुनील कुमार ने कहा, "आश्रम के अंदर 40-50 सेवादार हैं। वह ('भोले बाबा') अंदर नहीं हैं, न तो वह कल थे और न ही आज हैं।"
- प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, भक्त आशीर्वाद लेने और उपदेशक के पैरों के आस-पास की मिट्टी इकट्ठा करने के लिए दौड़े, लेकिन 'भोले बाबा' के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। बाद में, उन्होंने एक-दूसरे को धक्का देना शुरू कर दिया, जिसके कारण कई लोग जमीन पर गिर गए और अफरा-तफरी मच गई।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ लोग कीचड़ से भरे बगल के मैदान की ओर भागे, जिसके कारण वे गिर गए और अन्य भक्तों ने उन्हें कुचल दिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 110, 126 (2), 223 और 238 के तहत 'मुख्य सेवादार' कहे जाने वाले देवप्रकाश मधुकर के खिलाफ FIR दर्ज की है। वह धार्मिक आयोजन के मुख्य आयोजक हैं।
- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाथरस भगदड़ की जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। तीन सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज बृजेश कुमार श्रीवास्तव करेंगे। पैनल अगले दो महीनों में हाथरस भगदड़ के विभिन्न पहलुओं की भी जांच करेगा।