Layoff in Indian Startups: फंडिंग विंटर यानी फंडिंग की किल्लत ने भारतीय स्टार्टअप को तगड़ा झटका दिया है। इस साल 2023 के शुरुआती चार महीने में भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब 6 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी की है। यह छंटनी लागत कम करने और मुनाफे को लेकर किया गया है। पिछले साल से तुलना करें तो इस साल जनवरी-अप्रैल 2023 में 41 स्टार्टअप्स ने 5,868 एंप्लॉयीज की छंटनी की है जबकि पिछले साल समान अवधि में 8 स्टार्टअप्स ने 6,040 एंप्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखाया था। पिछले साल आंकड़ा थोड़ा बड़ा था लेकिन स्केलर के को-फाउंजर अभिमन्यु सक्सेना के मुताबिक पिछले साल जो छंटनी हुई थी, वह न होती तो स्टार्टअप बंद होने की नौबत आ जाती लेकिन इस साल ज्यादातर छंटनी सावधानी के रूप में हुई है।
इस कारण छंटनी का शुरु हुआ दौर
यह छंटनी ऐसे समय में हुई जब प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल इनवेस्टर्स ने हाई ग्रोथ कंपनियों में निवेश की रफ्तार सुस्त की। यह रफ्तार महंगाई में उछाल, दुनिया भर में बढ़ती ब्याज दरों, पश्चिमी देशों में मंदी की आशंका और यूरोप में चल रहे युद्ध के चलते सप्लाई चेन में दिक्कतों के चलते सुस्त हुई। निवेशकों ने सिर्फ उन्हीं कंपनियों में पैसे लगाने को प्रमुखता दी जिनका यूनिट इकनॉमिक्स पॉजिटिव रहा और मुनाफे का रास्ता स्पष्ट रहा। फंडिंग पाने के लिए स्टार्टअप फाउंडर्स अब इसी मानक को हासिल करने पर काम कर रहे हैं जबकि एक साल पहले तक इसे भविष्य के लिए छोड़ दिया जाता था।
इसके चलते कई स्टार्टअप्स को नगदी खर्च पर अंकुश लगाना पड़ा, ग्रोथ लक्ष्य फिर से तय करने पड़े, मौजूदा व्यवसाय मॉडल से पीछे हटना पड़ा और कुछ मामलों में इन्हें या तो खुद को बेचना पड़ा या ताला लगाना पड़ा। सक्सेना के मुताबिक फाउंडर्स समझ गए कि अब साल भर उस मॉडल पर काम करने का समय नहीं रहा जो आगे नहीं बढ़ रहा है और उसमें सिर्फ पैसे खर्च हो रहे हैं। इसके चलते एंप्लॉयीज की भारी संख्या में स्टार्टअप्स ने छंटनी की है और 2022 की शुरुआत से अब तक करीब 90 स्टार्टअप्स ने 24200 एंप्लॉयीज को काम से बाहर निकाला है।
एडुटेक कंपनियों को लगा तगड़ा झटका
आमतौर पर बाकी सेक्टर के मुकाबले एडुटेक में सबसे अधिक खर्च एंप्लॉयी पर होता है। अनएकेडमी, फिजिक्सवाला, वेदांतु, एरुडिटस और अपग्रैड; इन पांच एडुटेक यूनिकॉर्न्स ने वित्त वर्ष 2021-22 में कुल मिलाकर एंप्लॉयीज पर सालाना आधार पर 47 फीसदी अधिक 5465 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसमें नॉन-कैश ईएसओपी कॉस्ट्स भी शामिल है। अर्थ वेंचर फंड (Artha Venture Fund) की एमजी अनिरुद्ध ए दमानी के मुताबिक स्टार्टअप्स ने बजट से भी ज्यादा खर्च पर जरूरत से अधिक हायरिंग की और उस समय प्रोडक्टिविटी नहीं मिली और न ही मांग बनी तो ऐसे में सबसे महंगा रिसोर्स लेबर ही हुआ। 2022 की शुरुआत से लेकर अब तक आधे से अधिक छंटनी एडुटेक सेक्टर में हुई है।
अभिनव सक्सेना के मुताबिक हाई ग्रोथ के समय में जरूरत से बड़ी टीम बनाने पर आगे छंटनी ही करनी पड़ेगी, क्योंकि यह हर महीने के लिए एक फिक्स्ड कॉस्ट हो जाती है और उसके हिसाब से रेवेन्यू न बने तो खर्च कम करने के लिए ऐसा फैसला लेना ही पड़ेगा। इसने करीब 10700 एंप्लॉयीज को काम से निकाला है। ऑनलाइन लर्निंग में गिरावट के साथ-साथ प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों से फंडिंग में कटौती ने एडुटेक कंपनियों के लिए रास्ता कठिन कर दिया।