Leap Day 2024: पहले 30 फरवरी की तारीख भी आती थी, फिर हटा दी गई, जानिए क्या है इसका रहस्य

Leap Day 2024: फरवरी का महीना आपने 28 और 29 दिन का सुना होगा। लेकिन इतिहास में 30 फरवरी की तारीख भी दर्ज है। यह 30 फरवरी की तारीख इतिहास में दो बार आई। इसके बाद इसे हमेशा के लिए हटा लिया गया। आखिर क्यों 30 फरवरी की तारीख को खत्म कर दिया गया है, आइये जानते हैं रहस्य

अपडेटेड Mar 05, 2024 पर 1:38 PM
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Leap Day 2024: साल 1712 में 30 फरवरी की तारीख मनाई जाती है।

Leap Day 2024: फरवरी का महीना 30 दिन से कम का होता है। आमतौर पर सभी महीने 30 दिन और 31 दिन के होते हैं। वहीं फरवरी का महीना 28 और 29 दिन का होता है। आज तक फरवरी का महीना 30 और 31 दिन का नहीं सुना गया। बल्कि इसे 28 और 29 दिन के बारे में सुना गया है। कब 29 दिन की फरवरी होती है और कब 28 दिन की फरवरी होती है। इस बारे में हम सब लोग भली भांति परिचित हैं। आज हम फरवरी से जुड़े एक अलग मामले का जिक्र कर रहे हैं। जिसे सुनकर आपके पैरों तले जमीन धंस जाएगी।

फरवरी का महीना 30 दिन का भी मनाया गया है। यह कैलेंडर में भी दर्ज है। यानी इतिहास में फरवरी का महीना 30 दिन का रहा। इसके बाद इसे फिर से 28 और 29 दिन वाले फॉर्मूले पर लागू कर दिया गया। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब फरवरी का महीना 30 दिन के लिए दर्ज किया गया तो फिर आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी आई कि फिर से इसे 28 और 29 दिन में समेट दिया गया।

इतिहास में दो बार 30 फरवरी की तारीख आई


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतिहास में 2 बार फरवरी का महीना 30 दिन का दर्ज किया गया। स्वीडन कभी फिनलैंड का हिस्सा था। यहां साल 1700 के दौर में स्वीडन ने तय किया था कि वो जूलियन कैलेंडर से शिफ्ट होकर ग्रेगोरियन कैलेंडर की ओर जाएंगे। जूलियन कैलेंडर में साल 1700 एक लीप ईयर होना चाहिए था। लेकिन स्वीडन में लीप ईयर नहीं मनाया गया था। यहां गलती हो गई थी। यहां 1704 और 1708 के साल को लीप ईयर मान लिया गया। लिहाजा स्वीडन जूलियन और ग्रेगोरियन कैलेंडर, दोनों ही मामलों में पीछे हो गया। तब इस देश ने सोचा कि वो जूलियन कैलेंडर की ओर दोबारा लौटेंगे। ऐसे में स्वीडन में 30 फरवरी 1712 की तारीख को तय किया गया। इसकी वजह ये रही कि उस साल जूलियन कैलेंडर को अपनाया गया और 2 लीप दिनों को जोड़ा गया।

1712Feb30

1930-31 में फरवरी का महीना रहा 30 दिन का

इतिहास में 30 फरवरी का दूसरा मौका सोवियत रेवोल्यूशनरी कैलेंडर के अनुसार देखने को मिला। सोवियत यूनियन ने 1929 में एक रेवोल्यूशनरी कैलेंडर को लागू किया था। यह दौर साल 1930-31 का था। इस साल 30 फरवरी की तारीख शामिल की गई थी। यह घटना इतिहास में काफी चर्चित रही। इस कैलेंडर में एक महीने में 5 हफ्ते हुआ करते थे। कामकाज के लिए 30 दिन तय किए गए थे। बाकी बचे 5-6 दिनों को छुट्टी वाला दिन माना जाता था।

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