शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा की दूसरी शक्ति 'देवी ब्रह्मचारिणी' की पूजा करने का विधान है। माता के नाम से उनकी शक्तियों के बारे में जानकारी मिलती है। ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण से हैं। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करने से सौभाग्य, आरोग्य, आत्मविश्वास, आयु और अभय की प्राप्ति होती है। माता ब्रह्मचारिणी को ब्राह्मी भी कहा जाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा और उपवास करने से मनुष्य कठिन से कठिन समय में भी अपने रास्ते से अलग नहीं होता है।
ब्रह्मा की इच्छाशक्ति और तपस्विनी का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। मां ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। देवी को इस जगत की समस्त चर और अचर विद्याओं की जानकार माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी सफेद रंग का वस्त्र धारण करती हैं।
हिंदू पंचाग के अनुसार द्वितीया तिथि की शुरुआत 4 अक्टूबर रात 02:58 बजे हो जाएगी। जिसका समापन 5 अक्टूबर को सुबह 05:30 बजे होगा। नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना चाहिए। माता का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
मां ब्रह्मचारिणी पूजन विधि
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें। फिर पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें। माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं। ब्रह्मचारिणी मां को दूध और दूध से बनी हुई मिठाइयां बेहद प्रिय हैं। इसीलिए माता को दूध और दूध से बनी चीज का भोग अवश्य लगाएं। इसके साथ ही मां को सफेद वस्तुएं जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत भी जरूर अर्पित करें। माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें। इसके बाद देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी एक तपस्वी देवी हैं। माना जाता है कि जो कोई भी भक्त एकाग्र मन से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। उन्हें मां का आशीर्वाद जरूर मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी सफेद कपड़ों में रहती हैं। उनके दाहिने हाथ में एक जप माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। वह विश्वसनीयता और ज्ञान का प्रतीक हैं। इसके साथ ही मां ब्रह्मचारिणी प्रेम का सार भी हैं।