Sheikh Hasina Visa: भारत सरकार ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वीजा की अवधि बढ़ा दी है। जबकि उनका पासपोर्ट रद्द हो चुका है। बांग्लादेश ने प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन फिलहाल हसीना भारत में ही रहेंगी। भारत ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बढ़ती मांग के बीच उनके वीजा की अवधि बढ़ाई है। बांग्लादेश कि अंतरिम सरकार ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का पासपोर्ट रद्द कर दिया है। इसके अलावा अन्य 96 लोगों के पासपोर्ट भी रद्द कर दिए गए हैं। इन पर लोगों को जबरन गायब करने और जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं। अंतरिम सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण और मुकदमे को बड़ा मुद्दा बना रही है।
शेख हसीना पिछले साल अगस्त से देश में रह रही हैं। यह कदम बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से उनके प्रत्यर्पण की बढ़ती मांगों के बीच में उठाया गया है। हालांकि, सूत्रों ने हसीना के उन दावों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि 5 अगस्त को छात्रों के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ढाका से भागी हसीना को शरण दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में शरण देने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके वीजा विस्तार को शरण देने की दिशा में उठाया गया कदम नहीं माना जाना चाहिए।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हाल ही में भारत सरकार को एक राजनयिक नोट भेजकर, देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 23 दिसंबर को औपचारिक रूप से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की। ढाका के अधिकारियों ने दावा किया कि हसीना को 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और गायब होने की घटनाओं में उनकी कथित संलिप्तता से संबंधित आरोपों का सामना करना चाहिए।
इसमें 500 से अधिक लोग मारे गए थे। मंगलवार को बांग्लादेश के आव्रजन विभाग ने हसीना के पासपोर्ट सहित 97 पासपोर्ट रद्द करने की घोषणा की। यूनुस के प्रवक्ता अबुल कलाम आजाद मजूमदार ने कहा कि यह 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान जबरन गायब होने और हत्याओं के आरोपों से जुड़ा था।
शेख हसीना के खिलाफ दूसरा गिरफ्तारी वारंट जारी
बांग्लादेश की एक अदालत ने शेख हसीना के खिलाफ दूसरा गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इस बार वारंट जबरन गायब किए गए लोगों के मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए जारी किया गया। 77 वर्षीय हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप में एक गिरफ्तारी वारंट पहले ही जारी हो चुका है। हसीना को पिछले साल अगस्त में छात्र आंदोलन से उभरे आक्रोश के बाद सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा था। आरोप है कि बांग्लादेशी सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर 500 से अधिक लोगों का अपहरण किया, जिनमें से कुछ को कई सालों तक गुप्त ठिकानों पर हिरासत में रखा गया।
अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने 23 दिसंबर को ढाका में कहा, "हमने भारत को सूचित किया है और न्यायिक उद्देश्यों के लिए शेख हसीना की वापसी का अनुरोध किया है। यह एक नोट वर्बेल (राजनयिक नोट) के माध्यम से संप्रेषित किया गया है।"