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लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर आमरण अनशन करेंगे वांगचुक

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा दिए जाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी है। लेह में कड़कड़ाती ठंड के बीच हजारों लोगों ने सड़कों पर रविवार 4 फरवरी को मार्च निकाला। इससे पहले शनिवार (3 फरवरी) को लद्दाख में बंद का ऐलान किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) कर रही हैं

Akhileshअपडेटेड Feb 05, 2024 पर 11:04 PM
लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर आमरण अनशन करेंगे वांगचुक
Sonam Wangchuk ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर 19 फरवरी से आमरण अनशन शुरू करेंगे

लद्दाख (Ladakh) के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए अभियान चला रहे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने सोमवार को कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर 19 फरवरी से आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन में स्थानीय निवासियों की भागीदारी पर काम किया जा रहा है। रेमन मैगसायसाय पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award winner) से सम्मानित वांगचुक ने कहा कि संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों और लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा समेत अन्य मांगों के पूरा नहीं होने के चलते स्थानीय निवासियों में निराशा की भावना बढ़ रही है।

वांगचुक ने प्रस्तावित आमरण अनशन पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, "सबसे पहले वह थुपस्तान छेवांग (BJP के पूर्व लोकसभा सदस्य) और मैं होंगे और यदि हमारी मृत्यु हो जाती है, तो अगला कौन और कितने होंगे? इन सब की रूपरेखा तैयार की जा रही है।" उन्होंने कहा कि वह पहले 3 फरवरी से 3 सप्ताह के लिए अनशन करने की योजना बना रहे थे, लेकिन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के अध्यक्ष छेवांग ने उन्हें 19 फरवरी तक इंतजार करने के लिए कहा, जब केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख नेता नई दिल्ली में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात करेंगे।

राय एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति के प्रमुख हैं, जो लद्दाख निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गौर करने के लिए गठित की गई है। लद्दाख में शनिवार को एक बड़ी विरोध रैली आयोजित की गई, जब 'लेह एपेक्स बॉडी' और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (KDA) द्वारा अपने 4 सूत्री एजेंडे के समर्थन में आहूत बंद के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में पूरी तरह बंद रहा।

वांगचुक ने कहा, "करीब 30,000 लोग बाहर आये, जो लद्दाख के इतिहास में अभूतपूर्व है। यह ऐसा है, जैसे लद्दाख की एक तिहाई वयस्क आबादी सरकार को यह बताने के लिए बाहर आयी कि यह एक व्यक्ति की आवाज नहीं है। बल्कि हर कोई अपने क्षेत्र के लिए सुरक्षा उपाय चाहता है।"

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