Yoga guru Ramdev : योग गुरु रामदेव ने एक बार फिर से कोविड-19 (Covid19) पर एलोपैथी के असर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा कि वायरस से लोगों की रक्षा में सिर्फ वैक्सीन ही पर्याप्त नहीं है। रामदेव को योग और आयुर्वेद से जोड़ा जाना चाहिए।

Yoga guru Ramdev : योग गुरु रामदेव ने एक बार फिर से कोविड-19 (Covid19) पर एलोपैथी के असर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा कि वायरस से लोगों की रक्षा में सिर्फ वैक्सीन ही पर्याप्त नहीं है। रामदेव को योग और आयुर्वेद से जोड़ा जाना चाहिए।
हरिद्वार में एक कार्यक्रम से इतर, रामदेव (Ramdev) वैक्सीन की बूस्टर डोज (booster dose) लेने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) के पॉजिटिव पाए जाने से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे।
वैक्सीन से राष्ट्रपति तक सुरक्षित नहीं
रामदेव ने कहा, “आप एक राष्ट्रपति हों या खुद एक डॉक्टर हों, चाहें कितने भी बड़े शख्स हों लेकिन योग और आयुर्वेद के सपोर्ट के बिना कोई भी वैक्सीन आपकी कोरोनावायरस (coronavirus) के खिलाफ स्थायी रूप से सुरक्षा नहीं दे सकती।”
योग गुरु ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बड़े अधिकारी भी कोविड-19 वायरस से बीमार हो चुके हैं। रामदेव ने यह दावा भी किया कि मेडिकल साइंस वैक्सीन के नाम पर दुनिया को गुमराह कर रही है।
दुनिया फिर योग और आयुर्वेद की तरफ लौटेगी
रामदेव ने कहा, “दुनिया एक बार फिर से योग और आयुर्वेद की तरफ लौटेगी। लोग अपने किचन गार्डन में तुलसी, ऐलोवीरा और नीम गिलॉय लगा रहे हैं और इनसे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।”
2021 में रामदेव एलोपैथी को “स्टूपिड साइंस” करार दे चुके हैं और कोविड से जुड़ी मौतों के लिए डॉक्टर्स को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया था।
कोरोनिल पर रामदेव को मिली मोहलत
उधर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने योगगुरु बाबा रामदेव को कोरोनिल से कोविड-19 के उपचार के संबंध में कथित तौर पर गलत सूचना फैलाने और निराधार दावों को लेकर उचित और स्वीकार्य स्पष्टीकरण देने के लिए कुछ समय दिया है। डॉक्टरों के कुछ संगठनों ने रामदेव के खिलाफ मामले दाखिल किए थे। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि वह योग गुरु द्वारा दिए गए वर्तमान स्पष्टीकरण को लेकर ‘‘संतुष्ट’’ नहीं हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यह अपनी ‘‘पीठ पर थपथपाने जैसा’’ है, जो दावे को उचित करार देता है।
अदालत ने रामदेव को सलाह दी कि वह ‘शब्दों को तोड़-मरोड़कर न बोलें’ और स्पष्ट तौर पर यह कहें कि कोरोनिल कोविड-19 का उपचार नहीं है। न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि ‘शब्दों के जरिये विचार व्यक्त करना है, न कि इसे छिपाना है।’
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