स्टार्टअप कंपनियां हाई वैल्यूएशन के जरिए अधिक से अधिक फंड जुटाने की कोशिश करती हैं। हालांकि वैल्यूएशन अधिक रखने की स्ट्रैटजी हमेशा कारगर ही हो, यह जरूरी नहीं है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के फाउंडर नितिन कामत (Nithin Kamath) का मानना है कि बिजनेस के फंडामेंटल्स और वैल्यूएशन के बीच भारी गैप होने पर स्टार्टअप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कामत ने लिक्विडेशन प्रिफरेंस को लेकर 8 ट्वीट्स की एक कड़ी में इसे समझाया है कि हाई वैल्यूएशन से क्या दिक्कतें आ सकती हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि कारोबार में सब कुछ सही न चल रहा हो तो हाई वैल्यूएशन पर जो निवेश जुटाया गया है, वह कर्ज के बोझ की तरह हो जाता है।
