Adani-Hindenburg case: सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट की जांच के लिए पूर्व जज एएम सप्रे की अगुआई में एक छह सदस्यीय पैनल का गठन कर दिया है। यह कमेटी स्टॉक मार्केट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत बनाने के तरीके भी सुझाएगी। भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि यह पैनल शॉर्ट सेलर की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर भी गौर करेगा और पूरे हालात का आकलन करेगा।
दो महीने के भीतर जमा करनी होगी रिपोर्ट
इस बेंच ने केंद्र सरकार, वित्तीय सांविधिक संस्थाओं और सेबी (SEBI) के चेयरपर्सन को इस पैनल को पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। इस पैनल को दो महीने के भीतर रिपोर्ट जमा करनी है।
पूर्व जज ओपी भट्ट (OP Bhat) और जेपी देवदत्त (JP Devdatt) भी इस जांच समिति में शामिल होंगे। कोर्ट ने इंफोसिस के कोफाउंडर नंदन निलेकणि, वेटरन बैंकर केवी कामत (KV Kamath) और सोमशेखरन सुंदरेशन (Somasekharan Sundaresan) को भी कमेटी में रखा है।
सुंदरेशन से जुड़ा यह मामला रहा सुर्खियों में
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम बॉम्बे हाई कोर्ट में नियुक्ति के लिए सुंदरेशन के नाम की सिफारिश की थी। सरकार ने उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा था कि उन्होंने कोर्ड में लंबित मामलों में अपनी राय सोशल मीडिया पर साझा की थी।
हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने 24 जनवरी को रिपोर्ट जारी करके अदाणी ग्रुप की कंपनियों के स्टॉक्स में हेराफेरी और अकाउंटिंग फ्रॉड के आरोप लगाए थे। इसके बाद से अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में तगड़ी बिकवाली देखने को मिली थी।
हालांकि, Adani Group ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह सभी कानूनों का पालन करता है और डिसक्लोजर करता है। हालांकि, 24 जनवरी को रिपोर्ट जारी होने के बाद ग्रुप की कंपनियों की वैल्युएशन आधी से ज्यादा कम हो गई है।