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Daily Voice - FMCG सेक्टर नियर टर्म में जोरदार तेजी के लिए तैयार : सोनम श्रीवास्तव

Daily Voice : सोनम का कहना है कि ऑयल रिफाइनिंग सेक्टर में गांधार ऑयल रिफाइनरी का आईपीओ भी दिलचस्प है। कंपनी पर्सनल केयर और हेल्थकेयर उत्पादों के कारोबार में भी है। इससे तेल बाजार की अस्थिरता से कंपनी को सुरक्षा मिलती है। हालांकि, दुनियाभर में हो रहे आर्थिक बदलावों और कड़े पर्यावरणीय नियमों के चलते कंपनी के लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर निगेटिव असर पड़ सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 18, 2023 पर 12:12 PM
Daily Voice - FMCG सेक्टर नियर टर्म में जोरदार तेजी के लिए तैयार : सोनम श्रीवास्तव
Daily Voice : आगामी चुनावों के लिए सरकारी खर्च में बढ़त और ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में गिरावट से उत्पादन लागत में कमी से एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है

Daily Voice : अगले सप्ताह दलाल स्ट्रीट पर मेनबोर्ड सेगमेंट में पांच आईपीओ आने वाले हैं। राइट रिसर्च की फाउंडर और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि टाटा टेक्नोलॉजीज के आईपीओ का इश्यू प्राइस 475 रुपये से 500 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। ये इसके प्री-आईपीओ प्लेसमेंट प्राइस 401.8 रुपये से काफी ज्यादा है। ये कंपनी की मजबूती और आगे की ग्रोथ संभावनाओं में मजबूत विश्वास का संकेत है।

इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (आईआरईडीए) के बारे में उनका मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में विकास की बहुत व्यापक संभावनाएं हैं। आगे इसकी ग्रोथ और इसके प्रदर्शन पर नीतिगत बदलावों और तकनीकी प्रगति का सबसे ज्यादा योगदान होगा।

फ्लेयर राइटिंग इंडस्ट्रीज के आईपीओ पर बात करते हुए सोनम ने कहा कि स्टेशनरी कारोबार में कंपनी की मजबूत ब्रांड पहचान है। एजूकेशन और ऑफिस सप्लाई की मांग में लगातार हो रही बढ़त को देखते हुए यह आईपीओ लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छा लग रहा है। हालांकि, निवेशकों को इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि स्टेशनरी बाजार में काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धा है। इसके अलावा डिजिटलीकरण के बढ़ते रुझान से भी खतरा है।

सोनम का कहना है कि ऑयल रिफाइनिंग सेक्टर में गांधार ऑयल रिफाइनरी का आईपीओ भी दिलचस्प है। कंपनी पर्सनल केयर और हेल्थकेयर उत्पादों के कारोबार में भी है। इससे तेल बाजार की अस्थिरता से कंपनी को सुरक्षा मिलती है। हालांकि, दुनियाभर में हो रहे आर्थिक बदलावों और कड़े पर्यावरणीय नियमों के चलते कंपनी के लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर निगेटिव असर पड़ सकता है।

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