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HSBC के बाद अब JP Morgan ने भी भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटाई, Nifty के लिए ईयर एंड टारगेट में 10% की कटौती

ब्रोकरेज ने कहा कि भारत अभी भी कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे अपने समकक्षों की तुलना में काफी ऊंचे प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। भले ही देश के आर्थिक विकास की लॉन्ग टर्म की कहानी अभी भी बरकरार है, लेकिन निकट भविष्य के लिए इसका आउटलुक कमजोर हुआ है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Apr 25, 2026 पर 1:35 PM
HSBC के बाद अब JP Morgan ने भी भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटाई, Nifty के लिए ईयर एंड टारगेट में 10% की कटौती
इस साल निफ्टी अब तक 8.5% और सेंसेक्स 10% गिरा है।

HSBC के बाद अब जेपी मॉर्गन ने भी भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटा दी है। इसे "ओवरवेट" से कम करके "न्यूट्रल" कर दिया है। इसके पीछे अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय इक्विटीज की ज्यादा वैल्यूएशन और अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा आपूर्ति संकट के कारण कमाई पर पड़ रहे दबाव का हवाला दिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रोकरेज फर्म ने एक नोट में कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई और आर्थिक विकास के जोखिमों को बढ़ा सकती हैं, खपत को कम कर सकती हैं और निकट भविष्य में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। वहीं कमजोर होता रुपया इस दबाव को और बढ़ा रहा है।

इसके अलावा J.P.Morgan ने बेंचमार्क Nifty 50 के लिए ईयर एंड टारगेट को 10% घटाकर 27,000 कर दिया है। इस साल निफ्टी अब तक 8.5% और सेंसेक्स 10% गिरा है। अप्रैल की शुरुआत में J.P.Morgan ने एनर्जी, कंज्यूमर, ऑटो और वित्तीय सेवा जैसे घरेलू क्षेत्रों में वित्त वर्ष 2027 के लिए कमाई के अनुमानों में 2% से 10% तक की कटौती की थी। MSCI India की कमाई में वृद्धि के पूर्वानुमानों को भी 2026 के लिए 2 प्रतिशत घटाकर 11% और 2027 के लिए 1 प्रतिशत कम करके 13% कर दिया था।

कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको में सस्ते में निवेश का मौका

J.P.Morgan ने कहा, "हाल की गिरावट के बावजूद भारत अभी भी कोरिया, ब्राजील, चीन, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे अपने समकक्षों की तुलना में काफी ऊंचे प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। इन देशों में कम कीमत पर निवेश का मौका मिल रहा है, जबकि वहां भविष्य में कमाई भारत के बराबर ही या उससे बेहतर रहने की उम्मीद है।" ब्रोकरेज ने आगे कहा कि भारत की अभी AI (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस), डेटा सेंटर, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च-विकास वाले सेक्टर्स में मौजूदगी अच्छी नहीं है। इसकी वजह से इन सेक्टर्स में मजबूत पकड़ रखने वाले समकक्ष उभरते बाजारों की तुलना में भारत की कमाई में वृद्धि सीमित हो सकती है।

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