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MC BudEx डिक्सन टेक्नोलॉजीज, आईआरबी इंफ्रा अडानी पोर्ट्स में गिरावट के चलते 3% नीचे लुढ़का

MC BudEx पर सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयर में डिक्सन टेक्नोलॉजीज का नबंर पहले स्थान पर रहा जिसमें 18 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। जबकि दूसरे नंबर पर अडानी पोर्ट्स का स्थान रहा जिसमें 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा आईआरबी इंफ्रा और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई

Edited By: Sunil Guptaअपडेटेड Jan 28, 2023 पर 12:38 PM
MC BudEx डिक्सन टेक्नोलॉजीज, आईआरबी इंफ्रा अडानी पोर्ट्स में गिरावट के चलते 3% नीचे लुढ़का
Religare Broking के अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक और ट्रेडर्स पहले से ही मिले-जुले वैश्विक संकेतों और यूनियन बजट से पहले चुनौतियों का सामना कर रहे हैं

मंदड़ियो ने दलाल स्ट्रीट को जकड़ लिया है। इसकी वजह से मनीकंट्रोल  (Moneycontrol ) का बजट संवेदनशीलता सूचकांक (Moneycontrol's Budget Sensitivity Index (MC BudEx) 27 जनवरी को 3.04 प्रतिशत गिर गया। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और बैंकिंग स्टॉक्स में कमजोरी के चलते गिरावट आई। इसकी तुलना में निफ्टी और सेंसेक्स करीब 1.5 प्रतिशत फिसले। MC BudEx पर डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies), अडानी पोर्ट्स (Adani Ports), आईआरबी इंफ्रा (IRB Infra) और बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) में सबसे ज्यादा गिरावट आई। कुल 30 शेयरों में डाबर इंडिया (Dabur India), आईटीसी (ITC), टाटा पावर (Tata Power) और महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ही ऐसे शेयर रहे, जो हरे निशान में बंद हुए।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज फर्म डिक्सन टेक्नोलॉजीज  (Dixon Technologies) सबसे बड़ी लूजर रही। कंपनी के FY23 के लिए रेवन्यू गाइडेंस में 12,200 करोड़ रुपये की कटौती के बाद इसके शेयर में 18 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

ऑपेरेशंस से कंपनी का रेवन्यू सालाना आधार पर 22 प्रतिशत गिरकर 2,405 करोड़ रुपये रह गया। ग्रुप के सीएफओ सौरभ गुप्ता ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया, "हमने मुख्य रूप से मोबाइल कारोबार में मंदी के कारण अपने गाइडेंस को घटाया है। वित्त वर्ष 2024 के रेवन्यू गाइडेंस के 19,000 करोड़ रुपये से कम रहने की संभावना है।"

एनालिस्ट्स का कहना है कि कमजोर उपभोक्ता मांग और पास-थ्रू इनपुट की कम कीमतों के कारण भी रेवन्यू में कमी आई है। बजट 2023 (Budget 2023) आने ही वाला है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि सरकार भारत में खपत को बढ़ावा देने के लिए क्या योजना बना रही है।

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