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Mid-day mood : अतिरिक्त CRR ने बिगाड़ा बैंक शेयरों का मूड, महंगाई में बढ़त के अनुमान ने FMCG शेयरों को दिया झटका

Mid-day mood : बैंकिंग शेयरों पर एडीशनल सीआरआर का नकारात्मक असर देखने को मिला है। आईसीआरआर के तहत रखे गए फंड पर बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। इसकी वजह से बैंकिंग शेयरों में मायूसी देखने को मिली है। बता दें कि आईसीआरआर एक अस्थायी उपाय है और इसकी समीक्षा 8 सितंबर को या उससे पहले की जाएगी। ये भी बता दें कि सीआरआर की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 10, 2023 पर 1:24 PM
Mid-day mood : अतिरिक्त CRR ने बिगाड़ा बैंक शेयरों का मूड, महंगाई में बढ़त के अनुमान ने FMCG शेयरों को दिया झटका
Mid-day mood : भारतीय रिजर्व बैंक ने 2023-24 के लिए अपने महंगाई के पूर्वानुमान में संशोधन किया है। इसे 30 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.4 फीसदी कर दिया गया है

Mid-day mood : भारतीय इक्विटी मार्केट आज 10 अगस्त को कमजोरी के साथ खुले थे। आरबीआई एमपीसी के फैसलों के ऐलान के बाद इसमें और कमजोरी आती दिखी। हालांकि बाजार ये पहले से मानकर चल रहा था पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। लेकिन बाजार जानकारों का कहना है कि बैंकों के लिए अतिरिक्त सीआरआर (ICRR) का प्रावधान करने और दूसरी तिमाही के महंगाई के अनुमान में बड़ी बढ़ोतरी ने निवेशकों का मूड खराब कर दिया। 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने के बाद बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी को निकालने के केंद्रीय बैंक के प्रयासों के तहत बैंकों को 12 अगस्त से 10 फीसदी एडीशनल CRR (ICRR) बनाए रखना होगा।

सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

आरबीआई के इस ऐलान के बाद, निफ्टी बैंक लाल निशान में आ गया और दिन के निचले स्तर 44488 को हिट करता दिखा। निफ्टी 50 इंडेक्स ने भी इंट्राडे में 19506 का दिन का निचला स्तर हिट किया। ये पिछले बंद से भाव से लगभग 0.6 फीसदी कम है। सेंसेक्स भी लगभग 0.5 फीसगी की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा था। फिलहाल 12: 40 बजे दोपहर के आसपास निफ्टी 84.80 अंक यानी 0.43 फीसदी की गिरावट के साथ 19547.75 के स्तर पर दिख रहा है। वहीं, बैंक निफ्टी 0.62 फीसदी की कमजोरी के साथ 44602.30 के स्तर पर दिख रहा है। जबकि सेंसेक्स 261.82 अंक यानी 0.40 फीसदी की कमजोरी को साथ 65733.99 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट सौगत भट्टाचार्य का कहना है कि हमें एडीशनल सीआरआर का अंदाजा पहले से लगा लेना चाहिए था। आरबीआई ने नोटबंदी के बाद भी इसी तरह का कदम उठाया था। यह एक अच्छा कदम है क्योंकि सिस्टम में बहुत अधिक नकदी महंगाई के लिए अच्छी नहीं है।

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