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नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेक्टर 31 मार्च को दर्शकों के लिए खुलेगा, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा मुफ्त प्रवेश

ये सेंटर बच्चों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और विकलांगों के लिए मुफ्त होगा। यह सामुदायिक विकास के कार्यक्रमों पर फोकस किया जाएगा। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में Jio वर्ल्ड सेंटर के भीतर स्थित इस सांस्कृतिक केंद्र में तीन प्रदर्शन कला प्रदर्शन मंच हैं। इसमें 2,000 सीटों वाला एक ग्रैंड थिएटर, 250 सीटों वाला एक स्टूडियो थिएटर और 125 सीटों वाला एक डाइनेमिक क्यूब है। इन सभी में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी विदेशी थिएटर को भी टक्‍कर देते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 31, 2023 पर 10:21 AM
नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेक्टर 31 मार्च को दर्शकों के लिए खुलेगा, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा मुफ्त प्रवेश
सेंटर बच्चों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और विकलांगों के लिए मुफ्त होगा। यहां सामुदायिक विकास के कार्यक्रमों पर फोकस किया जाएगा

नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र, 31 मार्च को दर्शकों के लिए खुल जाएगा। ये एक एक बहु-आयामी और भारत का अपनी तरह का पहला सांस्कृतिक सेंटर है। 31 मार्च को ये केंद्र दर्शकों के लिए संगीत, रंगमंच, ललित कला और शिल्प के क्षेत्र में भारत के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों के प्रदर्शन के साथ खुलेगा। इस सेंटर के उद्घाटन के मौके पर पूरे 3 दिन का ब्लॉकबस्टर शो होगा। इसमें देश-विदेश के कलाकारों, बॉलीवुड और हॉलीवुड की हस्तियों के साथ तमाम गणमान्य व्‍यक्ति शामिल होंगे। सेंटर के उद्घाटन से एक दिन पहले गुरुवार को रामनवमी के शुभ दिन नीता मुकेश अंबानी ने कल्चरल सेंटर पहुंचकर विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की।

 31 मार्च को होगा उद्घाटन 

इस कल्‍चरल सेंटर के उद्घाटन के दिन यानी 31 मार्च को ‘स्वदेश’ नाम से एक विशेष कला और शिल्प प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।‘द ग्रेट इंडियन म्यूजिकल: सिविलाइज़ेशन टू नेशन’के नाम से एक संगीतमय नाट्य प्रदर्शन होगा। उद्घाटन वाले दिन भारतीय परिधान परंपरा की विविधता को प्रदर्शित करने वाली ‘इंडिया इन फैशन’ नाम से एक परिधान कला प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही भारत की सांस्कृतिक परंपराओं का दुनिया पर प्रभाव दिखाने वाला ‘संगम’ शीर्षक का एक विजुअल आर्ट शो भी होगा।

उद्घाटन दिवस की पूर्व संध्या पर बोलते हुए, नीता अंबानी ने कहा, "इस सांस्कृतिक केंद्र को बनाने की प्रक्रिया एक पवित्र यात्रा रही है। हम सिनेमा और संगीत, नृत्य और नाटक, साहित्य और लोककथाओं, कला और शिल्प और विज्ञान और आध्यात्मिकता में अपनी कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक सेंटर बनाने के इच्छुक थे। एक ऐसा स्थान होगा जहां हम भारत की सर्वश्रेष्ठ कलाओं को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगे हैं और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कलाओं ओर शिल्प को भारत के लिए प्रदर्शित करेंगे।"

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