Get App

स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर धड़ाम, रिटेल निवेशक झेल रहे सबसे ज्यादा मार; क्या यह बेचने का सही वक्त है?

भारतीय शेयर बाजार में जारी बिकवाली का सबसे ज्यादा असर उन सेगमेंट्स पर पड़ा है, जहां रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप, स्मॉलकैप और SME शेयरों में कहीं ज्यादा तेज और बड़ी गिरावट देखने को मिली है। साल की शुरुआत से अब तक BSE मिडकैप इंडेक्स करीब 5.8%, स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 8.1% और SME IPO इंडेक्स 10% से ज्यादा टूट चुका है

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Jan 21, 2026 पर 3:24 PM
स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर धड़ाम, रिटेल निवेशक झेल रहे सबसे ज्यादा मार; क्या यह बेचने का सही वक्त है?
Share markets: निफ्टी ने दो साल की SIP के आधार पर कोई खास रिटर्न नहीं दिया है

भारतीय शेयर बाजार में जारी बिकवाली का सबसे ज्यादा असर उन सेगमेंट्स पर पड़ा है, जहां रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप, स्मॉलकैप और SME शेयरों में कहीं ज्यादा तेज और बड़ी गिरावट देखने को मिली है। साल की शुरुआत से अब तक BSE मिडकैप इंडेक्स करीब 5.8%, स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 8.1% और SME IPO इंडेक्स 10% से ज्यादा टूट चुका है। यह बीते करीब 12 महीनों की सबसे तेज मंथली गिरावट मानी जा रही है। इसके मुकाबले, लार्जकैप शेयरों वाले सेंसेक्स और निफ्टी इंडेक्स में गिरावट सीमित रही है और ये दोनों इंडेक्स करीब 3.5% नीचे हैं।

दो साल की सुस्ती के बाद टूटा भरोसा

जानकारों के मुताबिक, हालिया गिरावट अचानक नहीं है। पिछले दो सालों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में रिकॉर्ड स्तर पर म्यूचुअल फंड निवेश आया था, जो लार्जकैप फंड्स की तुलना में कहीं ज्यादा था। इसके बावजूद, इस दौरान इन शेयरों ने निवेशकों को बहुत मजबूत रिटर्न नहीं दिए। लगातार आते निवेश से इन शेयरों के वैल्यूएशन तेजी से बढ़े, लेकिन अर्निंग ग्रोथ सीमित रही। ऐसे में जैसे ही मैक्रोइकोनॉमिक माहौल कमजोर हुआ और ग्लोबल अनिश्चितताएं बढ़ीं, सबसे पहला दवाब इन्ही हाई-वैल्यूएशन वाले शेयरों पर देखने को मिला।

वैल्यूएशन करेक्शन ने तेज की बिकवाली

मार्केट एनालिस्ट, दीपक जसानी का कहना है कि सिर्फ शेयरों की कीमतें ही नहीं गिरी हैं, बल्कि अर्निंग ग्रोथ भी कमजोर हुई है। उनके मुताबिक, जब तक लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में कमाई को लेकर साफ तस्वीर नहीं बनती, तब तक मजबूत रिकवरी की उम्मीद कम है। जसानी कहते हैं कि मौजूदा हालात में EPS ग्रोथ सीमित रह सकती है, जिससे वैल्यूएशन की री-रेटिंग होने की गुंजाइश भी कम हो जाती है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें