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SEBI ईसॉप के नियमों में कर सकता है बदलाव, आईपीओ पेश करने वाली कंपनियों को होगा फायदा

सेबी ने इस बारे में 20 मार्च को एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया है। सेबी के नियमों के तहत 'प्रमोटर्स' और 'मेबर्स ऑफ प्रमोटर्स ग्रुप' ईसॉप्स लेने के हकदार नहीं हैं। इसके अलावा कोई एंप्लॉयी प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप का मेंबर नहीं हो सकता है। लेकिन, ऐसे मामले हैं, जिसमें फाउंडर्स आईपीओ के लिए प्रमोटर्स के रूप में लिस्टेड होते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 20, 2025 पर 6:09 PM
SEBI ईसॉप के नियमों में कर सकता है बदलाव, आईपीओ पेश करने वाली कंपनियों को होगा फायदा
ईसॉप के नियमों में बदलाव से उन कंपनियों को फायदा हो सकता है, जो आईपीओ पेश करने का प्लान बना रही हैं।

सेबी एंप्लॉयी स्टॉक ऑप्शंस प्लान (ईसॉप्स) के नियमों में बदलाव कर सकता है। इसका फायदा आईपीओ पेश करने का प्लान बना रही कंपनियों को होगा। इससे कंपनियों के फाउंडर्स को ईसॉप्स से फायदा होगा। सेबी ने इस बारे में 20 मार्च को एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया है। अगर कोई व्यक्ति प्रमोटर की कैटेगरी में आने से एप्लॉयी नहीं रह जाता है तो उसे अपना ईसॉप्स रखने की इजाजत दी जा सकती है। शर्त यह है कि ईसॉप्स और दूसरे बेनेफिट्स कंपनी के आईपीओ पेश करने के एक साल पहले मिले होने चाहिए।

प्रमोटर्स ईसॉप्स लेने के हकदार नहीं

SEBI के नियमों के तहत 'प्रमोटर्स' और 'मेबर्स ऑफ प्रमोटर्स ग्रुप' ईसॉप्स लेने के हकदार नहीं हैं। इसके अलावा कोई एंप्लॉयी प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप का मेंबर नहीं हो सकता है। लेकिन, ऐसे मामले हैं, जिसमें फाउंडर्स आईपीओ के लिए प्रमोटर्स के रूप में लिस्टेड होते हैं। ऐसा कंपनी में उनकी हिस्सेदारी के आधार पर होता है। पब्लिक इश्यू से जुड़े नियमों के मुताबिक यह जरूरी है। ऐसी स्थिति में मौजूदा नियमों में यह साफ तौर पर नहीं कहा गया है कि क्या ऐसा एंप्लॉई (जैसे फाउंडर) जिसे ईसॉप मिला हुआ है, वह अपने ईसॉप को एक्सरसाइज कर सकता है या नहीं।

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