Stock Market News: कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ब्लू चिप शेयरों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से ज्यादा तेज उछाल दिख सकता है लेकिन इस महीने इसका उल्टा हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों अभी भी लीडिंग पोजिशन में है और इसमें सुस्ती के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस महीने मिडकैप इंडेक्स Nifty Midcap 100 अब तक 8.2 फीसदी मजबूत हुआ है जो जुलाई 2022 के बाद सबसे तेज उछाल है। इसी प्रकार Nifty Smallcap 100 इंडेक्स भी फरवरी 2021 के बाद से सबसे तेज 9.2 फीसदी मजबूत हुआ है। वहीं इसकी तुलना में Nifty 50 महज 3.8 फीसदी और BSE Sensex भी 3.3 फीसदी मजबूत हुआ है।
कैसे बदला इस महीने में मार्केट का रुझान
पिछले महीने अक्टूबर में मिडकैप, स्मॉलकैप और ब्लू-चिप शेयरों को लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका और आने वाले चुनावों के चलते दबाव झेलना पड़ा था। हालांकि अमेरिका में पैदावार बढ़ने, तेल की बढ़ती कीमतों और राज्य चुनावों के नतीजों को लेकर एनालिस्ट्स की चिंताएं नरम पड़ी हैं। SAS Online के फाउंडर श्रेय जैन के मुताबिक इस महीने जो तेजी आई है, वह कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई और आगे भी बेहतर कमाई के संकेत के चलते है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी पॉजिटिव माहौल तैयार किया।
मिडकैप और स्मॉलकैप के लिए सितंबर तिमाही शानदार
मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई सितंबर तिमाही में मजबूत रही। निफ्टी मिडकैप 100 की बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस और तेल और गैस को छोड़ 62 कंपनियों का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 153 फीसदी बढ़ गया जो 20 तिमाहियों में सबसे अधिक है। तिमाही आधार पर इसमें 4 फीसदी की उछाल रही। रेवेन्यू सालाना आधार पर 8 फीसदी और तिमाही आधार पर 5 फीसदी बढ़ा। वहीं निफ्टी स्मॉल कैप के BFSI और ऑयल एंड गैस को छोड़ 58 कंपनियों का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 46 फीसदी बढ़ा जो 9 तिमाहियों में सबसे अधिक रहा। तिमाही आधार पर यह 27 फीसदी उछला। रेवेन्यू सालाना आधार पर 3 फीसदी और तिमाही आधार पर 6.5 फीसदी उछला।
श्रेय के मुताबिक लाइफस्टाइल, रेस्टोरेंट, ऑटोमोबाइल और बिल्डिंग प्रोडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों की कमाई सबसे अधिक बढ़ी। इंडस्ट्रियल रिकवरी भी कई इंजीनियरिंग कंपनियों के आउटलुक पर पॉजिटिव असर डाल रहा है। हालांकि केमिकल, फार्मा औरआईटी सेक्टर जैसे सेक्टर्स में कमाई कम हुई।
हाल ही में 10 साल की अवधि वाला अमेरिकी बॉन्ड रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था लेकिन अब इस हाई से यह 0.60 फीसदी फिसल चुका है। वहीं पश्चिमी एशिया में तनाव के बावजूद तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके अलावा यहां कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और जेफरीज का मानना है कि अगर इसके नतीजे बीजेपी के पक्ष में आते हैं तो मार्केट में तेजी दिख सकती है। ब्रोकरेज को भरोसा है कि कंपनियां हाउसिंग, पावर और कई इंडस्ट्रियल सेक्टर में खर्च बढ़ाएंगी। एनालिस्ट्स का मानना है कि अभी मिडकैप शेयरों में लार्ज-कैप शेयरों की तुलना में अधिक तेजी की गुंजाइश दिख रही है। ऐसे में निवेशक मार्केट में गिरावट के दौरान लगातार हाई क्वालिटी वाले मिडकैप शेयरों में पैसा लगा रहे हैं।
ब्रोकरेज फर्म च्वाइस ब्रोकिंग के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट कृपाशंकर मौर्य के मुताबिक कमाई में अच्छी ग्रोथ की संभावनाओं को देखते हुए नियर से मीडियम टर्म में मिडकैप शेयर लॉर्जकैप की तुलना में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि कुछ मिडकैप शेयर ऐसे हैं जो अपने फेयर वैल्यूशन से अधिक उछल चुके हैं तो उनमें रिटर्न थोड़ा सुस्त हो सकता है।
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