देरी मुख्य रूप से फॉर्म्स में अहम स्ट्रक्चरल बदलावों और बैकएंड सिस्टम में चल रहे तकनीकी अपग्रेड के कारण है। ITR-2 और ITR-3 यूटिलिटीज यानि कि फॉर्म अभी भी इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव नहीं हैं। ध्यान रहे कि रिफंड पर टैक्सपेयर्स को हासिल होने वाला ब्याज, अन्य स्रोतों से आय माना जाता है और यह टैक्सेबल होता है
अपडेटेड Jul 04, 2025 पर 04:44 PM