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Sri Lanka ने समय पर IMF से मदद मांगी होती तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते

राजपक्षा सरकार बिगड़ती स्थिति का अंदाजा नहीं लगा सकी। उसने जल्द जरूरी कदम उठाने और आईएमएफ सहित दूसरी जगहों से मदद मांगने के बजाय इंतजार करना ठीक समझा। महीनों तक विपक्ष के नेताओं और एक्सपर्ट्स ने सरकार से कुछ करने की अपील की। लेकिन, सरकार पर असर नहीं पड़ा

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 18, 2022 पर 8:25 PM
Sri Lanka ने समय पर IMF से मदद मांगी होती तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते
इस साल मार्च तक श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 1.93 अरब डॉलर रह गया। यह एक महीने के आयात का बिल चुकाने के लिए भी काफी नहीं था। आयात घटने लगा। इसके चलते धीरे-धीरे जरूरी चीजों की कमी होने लगी।

श्रीलंका (Sri Lanka) के लोगों ने शायद ही कभी ऐसे दिन के बारे में सोचा होगा। देश की 2.2 करोड़ आबादी को जरूरी चीजें तक नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में दवाइयां नहीं है। फ्यूल के लिए लंबी लाइन लग रही है। घंटों उन्हें बगैर बिजली सप्लाई गुजारा करना पड़ रहा है। देश के लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षा (Gotabaya Rajapaksa) पर दबाव लगातर बढ़ रहा है।

दरअसल, राजपक्षा ने अगर समय पर जरूरी कदम उठाए होते तो आज हालात यहां तक नहीं पहुंचे होते। सरकार के पास विदेशी मुद्रा नहीं बची है। यही वजह है कि उसने विदेशी लोन का पेमेंट करने से मना कर दिया है। सरकार को हालात से निपटने का कोई रास्ता नहीं नजर नहीं आ रहा। स्थिति दिन ब दिन खराब हो रही है।

श्रीलंका की सरकार आज (सोमवार) आज अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) से बातचीत शुरू करेगी। वह आईएमएफ से आर्थिक मदद मांगेगी ताकि जरूरी चीजों का वह आयात कर सके। उसने इंडिया और चाइना सहित पड़ोसी देशों से भी मदद मांगी है।

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