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क्या है इनवेस्टमेंट की एक्टिव और पैसिव स्ट्रेटेजी, आपके लिए कौन सी स्ट्रेटेजी बेस्ट है?

एक्टिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में पोर्टफोलियो के लगातार प्रबंधन की जरूरत पड़ती है। यह काम फंड मैनेजर करता है। वह रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर यह तय करता है कि फंड का निवेश किस सिक्योरिटी मे करना है, किस सिक्योरिटी में कितना निवेश करना है और किस सिक्योरिटी से निवेश निकालना है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 14, 2024 पर 10:08 AM
क्या है इनवेस्टमेंट की एक्टिव और पैसिव स्ट्रेटेजी, आपके लिए कौन सी स्ट्रेटेजी बेस्ट है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपके लिए एक्टिव और पैसिव इनवेस्टिंग में से कौन सी स्ट्रेटेजी ज्यादा सही है, यह आपके इनवेस्टमेंट के गोल (लक्ष्य) और रिस्क लेने की आपकी क्षमता पर निर्भर करता है।

आप इनवेस्टमेंट में एक्टिव और पैसिव में से किस स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं? दरअसल ये इनवेस्टमेंट की दो अलग-अलग स्ट्रेटेजी हैं। इनमें से प्रत्येक स्ट्रेटेजी के अलग-अलग रिस्क और रिवॉर्ड हैं। कई इनवेस्टर इन दोनों स्ट्रेटेजी के बीच कनफ्यूज हो जाते हैं। वे यह भी तय नहीं कर पाते कि दोनों में से कौन सी स्ट्रेटेजी उनके लिए फायदेमंद है। मनीकंट्रोल आपको दोनों स्ट्रेटेजी से जुड़ी अहम बातें और इनके फायदेनुकसान बता रहा है।

एक्टिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या है?

एक्टिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी (Active Investment Strategy) में पोर्टफोलियो के लगातार प्रबंधन की जरूरत पड़ती है। यह काम फंड मैनेजर करता है। वह रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर यह तय करता है कि फंड का निवेश किस सिक्योरिटी मे करना है, किस सिक्योरिटी में कितना निवेश करना है और किस सिक्योरिटी से निवेश निकालना है। फंड मैनेजर का मकसद मार्केट से ज्यादा रिटर्न देना होता है। इस स्ट्रेटेजी में रिसर्च और बार-बार सिक्योरिटी की खरीद और बिक्री पर खर्च आता है। इसलिए इस स्ट्रेटेजी को महंगा माना जाता है।

एक्टिव स्ट्रेटेजी क्यों महंगी है?

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