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Noida Property: क्या अलॉटमेंट के बाद अथॉरिटी लीज पेमेंट बढ़ा सकती है? जानिये बायर्स के अधिकार

Property: नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में घर या प्लॉट खरीदने वाले ज्यादातर लोगों को लीजहोल्ड प्रॉपर्टी ही मिलती है, फ्रीहोल्ड का विकल्प आमतौर पर नहीं होता। ऐसे में खरीदारों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रॉपर्टी अलॉट होने और लीज डीड साइन होने के बाद अथॉरिटी उनसे एक्स्ट्रा या बढ़ी हुई लीज फीस मांग सकती है या नहीं

Edited By: Sheetalअपडेटेड Dec 20, 2025 पर 1:22 PM
Noida Property: क्या अलॉटमेंट के बाद अथॉरिटी लीज पेमेंट बढ़ा सकती है? जानिये बायर्स के अधिकार
Property: नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में घर या प्लॉट खरीदने वाले ज्यादातर लोगों को लीजहोल्ड प्रॉपर्टी ही मिलती है।

Property: नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में घर या प्लॉट खरीदने वाले ज्यादातर लोगों को लीजहोल्ड प्रॉपर्टी ही मिलती है, फ्रीहोल्ड का विकल्प आमतौर पर नहीं होता। ऐसे में खरीदारों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रॉपर्टी अलॉट होने और लीज डीड साइन होने के बाद अथॉरिटी उनसे एक्स्ट्रा या बढ़ी हुई लीज फीस मांग सकती है या नहीं?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लीज प्रॉपर्टी आमतौर पर 90 या 99 साल के लिए दी जाती है। इस पीरियड में खरीदार को उस जमीन या मकान का इस्तेमाल करने का अधिकार होता है। कई मामलों में लीज दो तरह से होती है या तो हर साल एनुअल लीज रेंट देना होता है, या फिर शुरुआत में ही वन-टाइम लीज रेंट (OTLR) चुकाकर आगे किसी तरह का सालाना किराया नहीं देना पड़ता।

रियल एस्टेट और कानूनी एक्सपर्ट का कहना है कि अगर सरकार या अथॉरिटी ने शुरुआत में ही वन-टाइम प्रीमियम लेकर लीज दी है और लीज डीड में कहीं भी सालाना किराया या भविष्य में बढ़ोतरी का जिक्र नहीं है, तो बाद में एक तरफा तरीके से नया चार्ज लगाना कानूनी तौर पर सही नहीं माना जाता। अदालतें भी कई मामलों में साफ कर चुकी हैं कि बिना लीज डीड में प्रावधान के नई फाइनेंशियल शर्तें नहीं जोड़ी जा सकतीं।

ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट भी यही कहता है कि लीज के लिए सालाना किराया जरूरी नहीं है। एक बार दिया गया प्रीमियम भी वैध लीज के लिए काफी है। यानी अगर आपने अलॉटमेंट के समय जो शर्तें मानी थीं, वही लागू होंगी। अथॉरिटी बाद में मनमाने तरीके से नियम नहीं बदल सकती।

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