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SIF: म्यूचुअल फंड और पीएमएस के बीच का रास्ता है सिफ, जानिए इसकी सबसे जरूरी बातें

सिफ का पोर्टफोलियो म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो से अलग होता है। यह ज्यादा फोकस्ड होता है। इसकी वजह यह है कि फंड मैनेजर्स खास थीम या मौकों के आधार पर निवेश के फैसले लेते हैं। सिफ रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत आते हैं। इससे इनवेस्टर्स के लिए पारदर्शिता बनी रहती है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 19, 2026 पर 4:40 PM
SIF: म्यूचुअल फंड और पीएमएस के बीच का रास्ता है सिफ, जानिए इसकी सबसे जरूरी बातें
स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड्स (SIF) म्यूचुअल फंड फ्रेमवर्क के तहत ज्यादा फ्लेक्सिबल स्ट्रक्चर है।

निवेश में रिस्क लेने वाले निवेशकों के लिए लंबे समय तक सिर्फ दो विकल्प थे। पहला म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम और दूसरा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस)। कई इनवेस्टर्स चाहकर भी पीएमएस में निवेश नहीं कर सकते, क्योंकि निवेश का मिनिमम अमाउंट ज्यादा है। साथ ही इसमें रिस्क भी ज्यादा है। ऐसे निवेशकों के लिए अब स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड्स (एसआईएफ) आ गया है। यह म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम और पीएमएस के बीच का रास्ता है।

फंड मैनेजर्स को कई तरह के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की आजादी

स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड्स (SIF) म्यूचुअल फंड फ्रेमवर्क के तहत ज्यादा फ्लेक्सिबल स्ट्रक्चर है। इसके फंड मैनेजर्स के पास कई तरह के इंस्ट्रूमेंट्स और कई तरह की स्ट्रेटेजी इस्तेमाल करने की आजादी होती है। वे बाजार के मौकों का फायदा उठाने के लिए जल्द कदम उठा सकते हैं। इसका मकसद इनवेस्टर्स को ज्यादा रिटर्न देना होता है।

सिफ का पोर्टफोलियो म्यूचुअल फंड से अलग

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