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Holika Dahan 2026: ग्रहण और भद्रा की वजह से होलिका दहन और होली के बीच बढ़ा एक दिन, जानें होलिका दहन की सही तारीख और समय

Holika Dahan 2026: होली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। लेकिन इससे पहले फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन करते हैं। मगर इस साल होलिका दहन और होली के बीच चंद्र ग्रहण और भद्र लग रही है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 17, 2026 पर 7:09 PM
Holika Dahan 2026: ग्रहण और भद्रा की वजह से होलिका दहन और होली के बीच बढ़ा एक दिन, जानें होलिका दहन की सही तारीख और समय
इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण के साथ ही भद्रा काल भी लग रहा है।

Holika Dahan 2026: होलिका दहन होली के मुख्य पर्व से एक रात पहले किया जाता है। यह अनुष्ठान हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इसके अगले दिन यानी चैत्र मास की प्रतिपदा को हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व रंगों की होली मनाई जाती है। इस पर्व में लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं, गले मिलते हैं, गुझिया खाते और खिलाते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। ये पर्व एक तरह से हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है, क्योंकि फाल्गुन हिंदू कैलेंडर का अंतिम महीना होता है और पूर्णिमा इसका अंतिम दिन।

हालांकि, इस फाल्गुन मास की पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण लग रहा है। इसके साथ ही भद्रा काल भी है। इन दोनों ही समय को हिंदू धर्म में अशुभ काल माना जाता है। इसलिए इस साल होलिका दहन की तारीख और समय को लेकर लोगों में भ्रम है। आइए जानें इस साल होलिका दहन का दिन और समय क्या रहेगा?

कब होगा होलिका दहन?

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 03 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। ज्योतिषियों की मानें तो 02 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, क्योंकि 03 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है। साथ ही 04 मार्च को होली मनाई जाएगी। 02 मार्च को भद्रा शाम 05:56 बजे से शुरू होकर तीन मार्च को सुबह 05:28 बजे तक रहेगी।

होलिका दहन की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। वह अपने ही भतीजे श्री हरि भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग होलिका की पूजा करते हैं और होलिका दहन की अग्नि में गाय के गोबर के उपले, गेहूं की बालियां और चने अर्पित करते हैं। साथ ही अग्नि की परिक्रमा लगाकर वे अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

04 मार्च को होगी होली

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