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Kalpavas Ke Niyam: खास होते हैं कल्पवास के ये 10 नियम, इनके बिना अधूरा माना जाता है कल्पवास

Kalpavas Ke Niyam: कल्पवास एक कठिन आध्यात्मिक अभ्यास है जिसके बारे में माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। यूं तो कल्पवास कभी भी किया जा सकता है, लेकिन कुंभ, महाकुंभ और माघ के पवित्र महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 05, 2026 पर 9:20 PM
Kalpavas Ke Niyam: खास होते हैं कल्पवास के ये 10 नियम, इनके बिना अधूरा माना जाता है कल्पवास
इस साल कल्पवास 3 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है और ये माघ पूर्णिमा तक चलेगा।

Kalpavas Ke Niyam: पौष माह की पूर्णिमा तिथि से दुनिया भर से भक्त और संत समाज के लोग प्रयागराज में पवित्र त्रिवेणी संगम पर इकट्ठा होते हैं। इस दिन से आस्था और आध्यात्म का अनूठा उपवास कल्पवास शुरू होता है। कल्पवास एक कठिन आध्यात्मिक अभ्यास है जिसके बारे में माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। यूं तो कल्पवास कभी भी किया जा सकता है, लेकिन कुंभ, महाकुंभ और माघ के पवित्र महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

कल्पवास क्या है?

कल्पवास तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के संगम तट पर एक महीने तक रहने की प्रतिबद्धता है। इसमें भक्त कठोर तपस्या करते हैं और खुद को आध्यात्मिक भक्ति के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस साल कल्पवास 3 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है और माघ पूर्णिमा तक चलेगा। माघ  महीने के 12वें दिन माघ मेला समाप्त होगा। शास्त्रों में इस समय कल्पवास से मिलने वाले पुण्य की तुलना हिंदू पौराणिक कथाओं में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के जीवन के एक दिन से की गई है।

कल्पवास के नियम

कल्पवास में 10 सख्त नियम हैं, जिनका सख्ती से पालन करना जरूरी होता है। अन्यथा कल्पवास को अधूरा माना जाता है। आइए जानें इसके बारे में :

  • कल्पवास करने वाले साधक को पूरे एक माह तक दिन में तीन बार यानि सूर्योदय से पहले, दोपहर में और शाम के समय संगम या फिर गंगा स्नान करना होता है।
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