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Magh Bihu 2026 date: मकर संक्रांति के दिन असम में मनाया जाता है माघ बिहू, जानें इस पर्व की तारीख और नियम

Magh Bihu 2026 date: मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों और स्वरूप में मनाया जाता है। असम में इसे माघ बिहू के नाम से जाना जाता है। इस पर्व के नियम मकर संक्रांति से थोड़े अलग हैं। आइए जानें इस साल माघ बिहू किस दिन मनाया जाएगा और इसके क्या नियम हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 13, 2026 पर 11:31 PM
Magh Bihu 2026 date: मकर संक्रांति के दिन असम में मनाया जाता है माघ बिहू, जानें इस पर्व की तारीख और नियम
पंचांग के अनुसार, माघ बिहू 2026 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

Magh Bihu 2026 date: हमारे देश में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के शुभ अवसर पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। ये सभी पर्व ऋतु परिवर्तन का प्रतीक माने जाते हैं और सूर्य पूजा इनका अहम हिस्सा है। चाहे गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण हो या तमिल नाडु में पोंगल, पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी हो या यूपी-बिहार में मकर संक्रांति का पर्व। नाम अलग-अलग, लेकिन औचित्य एक। इसी अवसर पर देश के पूर्वी राज्य असम में माघ बिहू का त्योहार मनाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे भोगली बिहू भी कहा जाता है, असम के सबसे महत्वपूर्ण कृषि त्योहारों में से एक है। यह सर्दियों के खत्म होने का उत्सव है जो कृषि से भी जुड़ता है।

भोगाली बिहू की तारीख

हर साल, माघ बिहू की सही तारीख को लेकर भ्रम रहता है। इस साल भी लोगों के मन में भोगली बिहू की तारीख को लेकर दुविधा है कि ये 14 जनवरी को मनाया जाएगा या 15 जनवरी को। पंचांग के अनुसार, माघ बिहू 2026 15 जनवरी को मनाया जाएगा।

15 जनवरी को क्यों मनाया जाएगा माघ बिहू

पंचांग के अनुसार, भोगली बिहू या माघ बिहू गुरुवार, 15 जनवरी, 2026 को मनाया जाएगा। इसकी तारीख सूर्य के मकर राशि में गोचर (मकर संक्रांति) के आधार पर तय की जाती है, जो 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद होता है। जब सूर्य का गोचर सूर्योदय के बाद होता है, तब यह त्योहार अगले दिन मनाया जाता है।

14 जनवरी की रात होगी उरुका

माघ बिहू से एक रात पहले की रात को उरुका कहा जाता है, जो 14 जनवरी, 2026 को मनाया जाएगा। उरुका की रात को, परिवार और समुदाय एक साथ मिलकर शानदार दावतें तैयार करते हैं और उनका आनंद लेते हैं। लोग चावल, मछली, मांस, दही और गुड़ से पारंपरिक असमिया व्यंजन बनाते हैं। बांस, पुआल और पत्तियों से भेलाघर नाम की अस्थायी झोपड़ियां बनाई जाती हैं, जहां लोग देर रात तक जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं। उरुका को भोगली बिहू समारोह का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है।

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