Get App

Shardiya Navratri 2025: ये हैं देवी के 51 शक्तिपीठ, आप इनमें से कितनों के कर चुके हैं दर्शन?

Shardiya Navratri 2025: हिंदू धर्म में देवी सती के 51 शक्तिपीठ का बहुत महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव की पत्नी सती के शरीर का जो अंग जहां गिरा, वहां एक शक्तिपीठ बना है। इन शक्तिपीठ के अस्तित्व में आने के पीछे एक खास वजह मिलती है। आइए जानें इनके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 23, 2025 पर 8:00 AM
Shardiya Navratri 2025: ये हैं देवी के 51 शक्तिपीठ, आप इनमें से कितनों के कर चुके हैं दर्शन?
तंत्र चूड़ामणि में देवी के प्रसिद्ध और लोकप्रिय 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं।

Shardiya Navratri 2025: नवरात्र का पर्व शुरू होने के साथ ही पूरे देश में बने मां के शक्तिपीठ में भक्तों की लाइन लगने लगती है। पूरे देश में देवी के प्रसिद्ध और लोकप्रिय 52 शक्तिपीठ हैं। हालांकि, शक्तिपीठ की संख्या 51 मानी जाती है, लेकिन तंत्र चूड़ामणि के अनुसार 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव की पत्नी सती के शरीर का जो अंग जहां गिरा, वहां एक शक्तिपीठ बना है। हिंदू धर्म में देवी सती के 51 शक्तिपीठ का बहुत महत्व है। इन शक्तिपीठ के अस्तित्व में आने के पीछे एक खास वजह मिलती है। आइए जानते हैं इन शक्तिपीठों के बनने की वजह है और कहां बने हैं 51 शक्तिपीठ?

पुराणों में अलग-अलग बताई गई है शक्तिपीठों की संख्या

देशी के शक्तिपीठ सिर्फ भारत में ही नहीं हैं, ये पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और तिब्बत में भी हैं। अलग-अलग पुराणों में इनकी संख्या भी अलग-अलग बताई गई है। जैसे देवी पुराण में 51 शक्तिपीठ, देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है। देवी पुराण में बताए गए 51 शक्तिपीठ में से भारत में कुल 42 शक्तिपीठ हैं, जबकि बांग्लादेश में 4, नेपाल में 2 और श्रीलंका-पाकिस्तान और तिब्बत में 1-1 शक्तिपीठ हैं।

माता सती के 51 शक्तिपीठ के नाम

देवी बाहुला- माता सती का बायां हाथ अजेय नदी के पास पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में गिरा था। यहां उनकी पूजा देवी बाहुला के रूप में होती है।

मंगल चंद्रिका- माता की दाईं कलाई पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में उज्जनि में गिरी थी। माता का मंगल चंद्रिका रूप यहां है।

भ्रामरी देवी- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का बायां पैर पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी में गिरा था, जहां मां सती का भ्रामरी रूप पूजा जाता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें