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Budget 2025: सरकार के लिए क्यों बड़ा सिरदर्द रहा है फिस्कल डेफिसिट, FY26 के लिए इसका क्या टारगेट होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले 10 साल में फिस्कल डेफिसिट को बढ़ने से रोकने में सफल रही है। 2020 में कोविड की महामारी अपवाद है, जब सरकार का फिस्कल डेफिसिट काफी बढ़ गया था। इससे पहले 2008-09 में फिस्कल डेफिसिट काफी ज्यादा बढ़ गया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 03, 2025 पर 11:29 AM
Budget 2025: सरकार के लिए क्यों बड़ा सिरदर्द रहा है फिस्कल डेफिसिट, FY26 के लिए इसका क्या टारगेट होगा?
2020-21 में फिस्कल डेफिसिट 9.1 फीसदी पर पहुंच गया था, जो 2023-24 में घटकर 5.9 फीसदी पर आ गया।

यूनियन बजट 2025 पेश होने से पहले सरकार के फिस्कल डेफिसिट को लेकर चर्चा बढ़ गई है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि 1 फरवरी, 2025 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण फिस्कल डेफिसिट के लिए 4.5 फीसदी का टारगेट कर सकती हैं। खासकर 1 जनवरी को इस साल अप्रैल-नवंबर के बीच फिस्कल डेफिसिट का डेटा आने के बाद इसकी संभावना और बढ़ गई है। सवाल है कि फिस्कल डेफिसिट का मसला इतना अहम क्यों है, पिछले सालों में फिस्कल डेफिसिट कितना रहा है, एफआरबीएम एक्ट का क्या मतलब है?

दो बार फिस्कल डेफिसिट काफी ज्यादा बढ़ गया था

फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) लंबे समय से सरकार का सिरदर्द रहा है। सरकार की कोशिश इसे काबू में रखने की होती है। लेकिन, यह कई बार काबू से बाहर निकल जाता है। 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस और 2020 में कोविड की महामारी इसके दो बड़े उदाहरण हैं। दोनों ने फिस्कल डेफिसिट को काबू में रखने की सरकार की कोशिशों को तगड़ी चोट पहुंचाई थी। हालांकि, कोविड के बाद से सरकार ने इस पर अपना फोकस बढ़ाया है।

FRBM एक्ट की जरूरत और इसका मतलब 

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