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Economic Survey 2026: आर्थिक सर्वे में रामायण के 'युद्ध कांड' की हुई एंट्री, जानें उस एक लाइन का असली मतलब

Economic Survey 2026: आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में रामायण के 'युद्ध कांड' के एक श्लोक ने सबका ध्यान खींचा है! वित्त मंत्रालय ने इस श्लोक के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था की भविष्य की चुनौतियों और उनसे निपटने के साहस का एक बड़ा संदेश दिया है। आखिर क्या है इस एक लाइन का असली मतलब और यह देश की आर्थिक भविष्य के बारे में क्या कहती है?

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Jan 29, 2026 पर 3:36 PM
Economic Survey 2026: आर्थिक सर्वे में रामायण के 'युद्ध कांड' की हुई एंट्री, जानें उस एक लाइन का असली मतलब
Economic Survey 2026: सर्वे में इस श्लोक के जरिए चीन के हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट का एनालिसिस किया गया है

Economic Survey 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार 29 जनवरी को संसद में 'आर्थिक सर्वे 2026' पेश किया है। इस आर्थिक सर्वे में बदलती ग्लोबल स्थिति को लेकर एक अहम चेतावनी दी गई है। खास बात यह है कि इस बात को समझाने के लिए सर्वे में 'रामायण' के युद्ध कांड के एक श्लोक का सहारा लिया गया है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है।

आर्थिक सर्वे के “भविष्य की गहराती अनिश्चितताएं” नाम के एक चैप्टर में कहा गया है कि दुनिया अब तेजी से बदल रही है और ग्लोबल व्यापार का पुराना ढांचा टूट रहा है। आज के दौर में व्यापार, पूंजी और तकनीक को केवल आर्थिक साधन नहीं, बल्कि दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में देशों को अपने प्रतिद्वंद्वियों से सीख जरूर लेनी चाहिए, लेकिन उन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए। सर्वे में रामायण का जिक्र करते हुए बताया गया है कि आत्मनिर्भरता और रणनीतिक समझ आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

लंका के युद्धक्षेत्र से आज की दुनिया तक

आर्थिक सर्वे में ‘युद्ध कांड’ के उस पल का उदाहरण दिया गया है, जब रावण के वध के बाद भगवान राम कहते हैं कि ज्ञान शत्रु से भी लिया जा सकता है, लेकिन उसके मूल्यों, विचारों या तरीकों को अपनाना जरूरी नहीं होता। सर्वे के अनुसार, यही विचार आज की ग्लोबल अर्थव्यवस्था में भारत के लिए सबसे प्रासंगिक है। यानी दूसरों से सीखो जरूर, लेकिन आत्मनिर्भर रहकर।

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