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डीप फेक और AI कंटेंट से निपटने के लिए IT मंत्रालय ने जारी किए निर्देश, यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय

अब यूजर्स को कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन देना होगा। कंपनियों को AI डिटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाने होंगे। AI से बने कंटेंट की लेबलिंग करनी होगी। कंपनियों को हर 3 महीने में पॉलिसी अपडेट देना होगा। डीप फेक अपलोड करने वाले उपभोक्ता को चेतावनी देनी होगी

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Feb 11, 2026 पर 4:54 PM
डीप फेक और AI कंटेंट से निपटने के लिए IT मंत्रालय ने जारी किए निर्देश, यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय
अब यूजर्स को कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन देना होगा। कंपनियों को AI डिटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाने होंगे

IT मंत्रालय ने डीप फेक और AI कंटेंट से निपटने के लिए जारी गाइडलाइंस में यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय की है। यूजर्स को बताना होगा कि कंटेंट AI जनरेटेड तो नहीं है। साथ ही कंपनियों को हर 3 महीने में यूजर्स को चेतावनी भी देनी होगी। IT मंत्रालय ने गाइडलाइंस में क्या क्या कहा है, पूरी डिटेल्स बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि AI और डीप फेक रूल्स पर IT मंत्रालय ने FAQs जारी किए हैं। AI कंटेंट से निपटने के लिए यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय की गई है।

 यूजर्स को देना होगा कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन 

अब यूजर्स को कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन देना होगा। कंपनियों को AI डिटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाने होंगे। AI से बने कंटेंट की लेबलिंग करनी होगी। कंपनियों को हर 3 महीने में पॉलिसी अपडेट देना होगा। डीप फेक अपलोड करने वाले उपभोक्ता को चेतावनी देनी होगी। वॉइस क्लोन करने पर भी चेतावनी दी जाएगी। शिकायत मिलने पर न्यूड और सेक्शुअल कंटेंट 2 घंटे में हटाना होगा।

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