अमेरिका-ईरान युद्ध में पाकिस्तान एक शांतिदूत बनकर सामने आया है और ये तो वही स्थिति हो गई कि '900 चूहे खाके बिल्ली हज को चली'। खुद आतंक को पाल पोसना वाला देश आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े देशों के बीच शांति कायम करने की कड़ी बना है। हालांकि, इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को मिली इस जिम्मेदारी का असर भारत पर क्या होगा और आखिर क्यों भारत इस लड़ाई में मध्यस्था करने आगे नहीं आया?
