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Assembly Elections 2023 : राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नतीजों का कितना असर लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा?

इन पांच राज्यों में लोकसभा की कुल 83 सीटे हैं। 65 सीटे तो सिर्फ राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में हैं। राजस्थान में 25, एमपी में 29 और छत्तीसगढ़ में 11 सीटे लोकसभा की हैं। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद कांग्रेस आत्मविश्वास से भरी दिख रही है। भाजपा इन चुनावों में बहुत ज्यादा ताकत का इस्तेमाल करती दिख रही है। शायद इसकी वजह कुछ राज्यों के विधानसभा के चुनावों के नतीजों से मिला सबक है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 13, 2023 पर 4:49 PM
Assembly Elections 2023 : राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नतीजों का कितना असर लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा?
BJP को पता है कि लोगों की नजरें इन 5 राज्यों के चुनावों के नतीजों पर लगी हैं। भाजपा पर मध्य प्रदेश में सत्ता में लौटने की चुनौती है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान को उसे कांग्रेस के हाथों से निकालने का चैलेंज है। ऐसे में वह किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती।

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित 5 राज्यों के चुनावी नतीजे 3 दिसंबर को आ जाएंगे? BJP और कांग्रेस (Congress) सहित कई छोटे दलों ने इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। इसकी वजह यह है कि इन पांच राज्यों में लोकसभा की कुल 83 सीटे हैं। 65 सीटे तो सिर्फ राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में हैं। राजस्थान में 25, एमपी में 29 और छत्तीसगढ़ में 11 सीटे लोकसभा की हैं। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में जीत के बाद कांग्रेस आत्मविश्वास से भरी दिख रही है। भाजपा इन चुनावों में बहुत ज्यादा ताकत का इस्तेमाल करती दिख रही है। शायद इसकी वजह कुछ राज्यों के विधानसभा के चुनावों के नतीजों से मिला सबक है। BJP को पता है कि लोगों की नजरें इन 5 राज्यों के चुनावों के नतीजों पर लगी हैं। भाजपा पर मध्य प्रदेश में सत्ता में लौटने की चुनौती है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान को उसे कांग्रेस के हाथों से निकालने का चैलेंज है। ऐसे में वह किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती। सवाल है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों का कितना असर 2024 के लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा?

मोदी के करिश्मे पर नजर

पिछले करीब 9 सालों में हुए लोकसभा-विधानसभा चुनावों में मोटी फैक्टर हावी रहा है। नरेंद्र मोदी 2014 में लोकसभा चुनावों में भाजपा के जीत हासिल करने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। तब से करीब हर चुनाव में भाजपा ने उनका इस्तेमाल किया है। मोदी करिश्मा का असर भी देखने को मिला है। 9 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी मोदी का करिश्मा बरकरार है। हालांकि, कुछ राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इसमें कमी आई है। क्या वाकई मोदी करिश्मा घट रहा है? पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से कुछ हद तक इस सवाल का जवाब मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि राजस्थान, एमबी, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनावों के ऐलान से पहले ही मौदी के दौरे शुरू हो गए थे। उनकी बड़ी चुनावी रैलियों का सिलसिला शुरू हो गया था। प्रधानमंत्री ने हजारों करोड़ों रुपये के परियोजानाओं का ऐलान भी इन राज्यों में किया है।

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