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ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा तोहफा, बजट में ₹18,000 करोड़ का इनसेंटिव देने की तैयारी में सरकार

सरकार ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री के लिए 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 18,000 करोड़ रुपये) का इनसेंटिव प्रोग्राम लॉन्च करने की तैयारी में है। इस इनसेंटिव प्रोग्राम से सरकार को अगले 5 सालों में ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत करीब 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 27, 2022 पर 9:12 PM
ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा तोहफा, बजट में ₹18,000 करोड़ का इनसेंटिव देने की तैयारी में सरकार
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की मौजूदा लागत करीब 300 से 400 रुपये प्रति किलो है

सरकार ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री के लिए 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 18,000 करोड़ रुपये) का इनसेंटिव प्रोग्राम लॉन्च करने की तैयारी में है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य इसके जरिए इमिशन को कम करना और इस फील्ड एक प्रमुख एक्सपोर्टर देश बनने का है। इस इनसेंटिव प्रोग्राम से सरकार को अगले 5 सालों में ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत करीब 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा आंशिक रूप से इंडस्ट्री के पैमाने को बढ़ाकर होगा। एक सूत्र ने बताया कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की मौजूदा लागत करीब 300 से 400 रुपये प्रति किलो है।

अमेरिका और यूरोपीय यूनियन पहले ही अपने यहां ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए अरबों डॉलर के इनसेंटिव का ऐलान कर चुके हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या होता है?

हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इसे एक इलेक्ट्रिक प्रक्रिया के जरिए पानी को विभाजित करके बनाया जाता है, जिसे इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं। वहीं जिन डिवाइसों या उपकरणों से इस प्रक्रिया को पूरा किया जाता है, उन्हें इलेक्ट्रोलाइजर कहते हैं। जब ये इलेक्ट्रोलाइजर किसी रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए चलते हैं, तब जो हाइड्रोजन बनता है उसे ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता है।

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