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BharatPe Losses: अकाउंटिंग ने 811 करोड़ के घाटे को बना दिया 5594 करोड़ का, समझें क्या है पूरा मामला, कब सुधरेगी स्थिति?

फिनटेक कंपनी BharatPe को वित्त वर्ष 2021-22 में 5594 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। हालांकि कंपनी का दावा है कि अकाउंटिंग के एक नियम के चलते ही यह घाटा बहुत बड़ा दिख रहा है और वास्तव में उसका नुकसान सिर्फ 811 करोड़ रुपये का है।

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 05, 2023 पर 2:58 PM
BharatPe Losses: अकाउंटिंग ने 811 करोड़ के घाटे को बना दिया 5594 करोड़ का,  समझें क्या है पूरा मामला, कब सुधरेगी स्थिति?
स्टार्टअप की दुनिया में भारतपे (BharatPe) जाना माना नाम है। को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के कंपनी से बाहर निकलने के बाद से यह लगातार चर्चा में बना हुआ है।

स्टार्टअप की दुनिया में भारतपे (BharatPe) जाना माना नाम है। को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के कंपनी से बाहर निकलने के बाद से यह लगातार चर्चा में बना हुआ है। कुछ दिन पहले इसके सीईओ सुहैल समीर (Suhail Sameer) ने इस्तीफा दिया और अब भारतपे (BharatPe) का घाटा चर्चा में है। इसे वित्त वर्ष 2021-22 में 5594 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ जिसने चौंकाया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि भारी-भरकम घाटा अकाउंटिंग के एक नियम के चलते है। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवेन्यू 169 फीसदी बढ़कर 321 करोड़ रुपये रहा। हालांकि घाटा सालाना आधार पर 2961 करोड़ रुपये से 89 फीसदी बढ़कर 5594 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

क्या है अकाउंटिंग का वह नियम, जिसने बढ़ाया घाटा

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी नलिन नेगी के मुताबिक भारतपे को जो भारी-भरकम घाटा बैलेंस शीट में दिख है, वह कंपल्सरिली कंवर्टिबल प्रिफरेंस शेयर (CCPS) के चलते है। स्टार्टअप को आमतौर पर ऐसा निवेश मिलता है जिसमें रीपेमेंट या बायबैक जैसी शर्तें जुड़ी होती हैं। इसके अलावा आईपीओ की स्थिति इसे कॉमन स्टॉक या स्टैंडर्ड इक्विटी शेयरों में भी बदला जा सकता है। अब यहां भारतपे के मामले में दिक्कत ये हुई कि भारतीय अकाउंटिंग के नियमों के मुताबिक सीसीपीएस के फेयर वैल्यूएशन में किसी भी बदलाव को देनदारी के तौर पर लिया जाएगा।

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