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स्मार्टफोन चलाने वाले बच्चे इस बीमारी के हो रहे हैं शिकार, फौरन संभाले नहीं तो हो जाएंगे अंधे

Myopia Treatment: इन दिनों डिजिटल युग में स्मार्टफोन का चलन तेजी से बढ़ा है। हर हाथ में मोबाइल होने की वजह से बच्चों के हाथ में आसानी से पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे कई तरह के वीडियो देखने लगते हैं। इससे आंखों की रोशनी का खतरा मंडराने लगा है। इसे मायोफिया कहते हैं। यब बीमारी बच्चों में तेजी से फैल रही है

Jitendra Singhअपडेटेड Apr 07, 2025 पर 9:58 AM
स्मार्टफोन चलाने वाले बच्चे इस बीमारी के हो रहे हैं शिकार, फौरन संभाले नहीं तो हो जाएंगे अंधे
Myopia Treatment: मायोपिया आंखों की एक गंभीर बीमारी है. भारत में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

धीरे-धीरे बहुत कुछ डिजिटल होता जा रहा है। स्मार्ट मोबाइल और स्मार्ट टीवी हर घर में अपनी पैठ जमा चुके हैं। जिससे बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ता जा रहा है। अब तो ऑनलाइन एजुकेशन, खरीदारी जैसे तमाम काम होने की वजह से लोगों का स्मार्टफोन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। हर हाथ में स्मार्टफोन होने की वजह से बच्चों के पास भी स्मार्टफोन अपनी जगह बना चुका है। लगातार स्मार्टफोन, टीवी और रील्स देखने से बच्चे मायोफिया के शिकार हो रहे हैं। यह एक आंख से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। भारत में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चे इसका सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

मायोपिया से पीड़ित लोगों की आंख रोशनी में कमी आती है। इसे निकट दृष्टि दोष या शॉर्टसाइटेडनेस भी कहा जाता है। हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक, अभी दुनिया में करीब 35 फीसदी बच्चे मायोपिया की चपेट में है। यह आंकड़ा 2050 तक 40 फीसदी तक बढ़ सकता है। इस हिसाब से हर तीसरा बच्चा मायोपिया (Myopia) का शिकार हो रहा है।

मायोफिया है बेहद खतरनाक बीमारी

हेल्थ से जुड़े जानकारों का कहना है कि आजकल की लाइफस्टाइल ही कुछ ऐसी है कि लोग लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आउटडोर एक्टिविटी नहीं होने की वजह से बच्चों में मायोपिया के मामलों तेजी से बढ़ रहे हैं। ज्यादा स्क्रीन में समय बिताने पर बच्चों की आंखों, रेटिना और मस्तिष्क को पेरशानी होने लगती है। जिससे आईबॉल में निकट दृष्टि में बदलाव आ जाता है। ऐसे में चीजें ब्लर दिखाई देती हैं या फिर नहीं दिखाई देती हैं। वहीं पास की चीजें बिल्कुल साफ नजर आती हैं। ऐसे में बच्चों को जल्दी चश्मा लग जाता है। इसलिए डॉक्टर शुरू से ही उनका ख्याल रखने की सलाह देते हैं। मायोपिया के शिकार बच्चे टीवी, रास्ते में साइन बोर्ड, स्कूल में ब्लैक बोर्ड ठीक तरह से नहीं देख पाते हैं।

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