हाल में आए हाई फ्रीक्वेंसी आंकड़ों ने देश की इकोनॉमी की मजबूत रिकवरी को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एशिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी के सामने ग्लोबल मंदी और केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीतियों में कड़ाई जैसी कई चुनौतियां है।
