Google vs Bing: गूगल के दबदबे का ये है राज, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ ने बताया क्यों पिछड़ी बिंग

Google vs Bing: ऑनलाइन कुछ सर्च करना होता है तो आमतौर पर अधिकतर यूजर्स गूगल का सहारा लेते हैं। सर्च इंजन के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) का बिंग (Bing) इस मामले में काफी पीछे है। ऐसा क्यो? माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नाडेला के मुताबिक इसकी वजह ये है कि गूगल ने अनुचित कारोबारी तरीकों का इस्तेमाल किया जिसके चलते सर्च इंजन के तौर पर इसका दबदबा बढ़ा

अपडेटेड Oct 04, 2023 पर 1:50 PM
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माइक्रोसॉफ्ट की बिंग 2009 से ही मार्केट में पांव जमाने की तैयारी कर रही है। हालांकि सत्या नाडेला का कहना है कि यह कभी गूगल से टक्कर नहीं ले सकी और इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि एपल के साथ इसकी साझेदारी।

Google vs Bing: ऑनलाइन कुछ सर्च करना होता है तो आमतौर पर अधिकतर यूजर्स गूगल का सहारा लेते हैं। सर्च इंजन के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) का बिंग (Bing) इस मामले में काफी पीछे है। ऐसा क्यो? माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नाडेला के मुताबिक इसकी वजह ये है कि गूगल ने अनुचित कारोबारी तरीकों का इस्तेमाल किया जिसके चलते सर्च इंजन के तौर पर इसका दबदबा बढ़ा। इसी के चलते गूगल को बिंग टक्कर नहीं दे पाई। उन्होंने ये बातें अमेरिका के वॉशिंगटन के कोर्ट में गवाही के तौर पर कही।

Microsoft CEO ने क्यों दी कोर्ट में गवाही

माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नाडेला ने यह बयान एक मुकदमे के चलते दिया। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के खिलाफ एंट्रीट्रस्ट ट्रॉयल चल रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग के वकील फेडरल जज के सामने यह दलील पेश कर रहे हैं कि गूगल ने एपल (Apple) समेय बाकी कंपनियों को अरबों दिए ताकि मार्केट में इसकी मोनोपॉली बनी रह सके। जस्टिस डिपार्टमेंट का आरोप है कि गूगल ने मार्केट में अपने दबदबे का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा और इनोवेशन को खत्म करने में किया जिससे कंज्यूमर्स को घाटा हुआ।


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माइक्रोसॉफ्ट के बाद तीन महीने की यह सुनवाई किसी बड़ी तकनीकी कंपनी के खिलाफ अमेरिका का सबसे बड़ा एंटीट्रस्ट केस है। इससे पहले जस्टिस डिपार्टमेंट ने 1990 के दशक के आखिरी में माइक्रोसॉफ्ट पर ऐसा ही मामला दर्ज किया था। माइक्रोसॉफ्ट पर विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम के डॉमिनेंस को लेकर मुकदमा चलाया गया था।

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'पॉपुलर नहीं, डॉमिनेंट'

माइक्रोसॉफ्ट की बिंग 2009 से ही मार्केट में पांव जमाने की तैयारी कर रही है। हालांकि सत्या नाडेला का कहना है कि यह कभी गूगल से टक्कर नहीं ले सकी और इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि एपल के साथ इसकी साझेदारी। सत्या ने गूगल के वकीलों से कहा कि आप इसे पॉपुलर कह सकते हैं लेकिन यह डॉमिनेंट है। नाडेला के मुताबिक कंपनियों के साथ समझौते के चलते यह स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर डिफॉल्ट ब्राउजर बन गया और मूल रूप से यूजर्स के पास डिफॉल्ट ब्राउजर से स्विच करने के लिए अधिक विकल्प नहीं हैं। बिंग ने विकल्प पेश तो किया लेकिन यह डिफॉल्ट नहीं है।

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सत्या नाडेला ने मोटे तौर पर सरकार के इस तर्क का समर्थन किया कि दुनिया का प्रमुख सर्च इंजन होने के नाते गूगल ने डेटा के जरिए एक नेटवर्क इफेक्ट बना दिया। इसके चलते ऐड देने वालों और यूजर्स के लिए गूगल सबसे शक्तिशाली टूल बन गया। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के मुताबिक जब आपके पास मार्केट में हिस्सेदारी नहीं हो तो आगे बढ़ना और भी कठिन हो जाता है।

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