Prayagraj Shootout: कौन है गैंगस्टर से नेता बना अतीक अहमद? उमेश पाल की क्यों की गई दिनदहाड़े हत्या, जानें पूरी डिटेल्स
Umesh Pal Murder Case: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड (Raju Pal murder case) के गवाह उमेश पाल (Umesh Pal) की सनसनीखेज हत्या के बाद गैंगस्टर से नेता बना अतीक अहमद (Atique Ahmed) की आपराधिक गतिविधियां एक बार फिर सुर्खियों में है। अतिक अहमद इस समय अहमदाबाद जेल में बंद है। बीते 24 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज थाना अंतर्गत जयतीपुर में उमेश पाल और उसके एक सुरक्षाकर्मी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी
Umesh Pal Murder Case: उमेश पाल 2005 में प्रयागराज में हुई राजू पाल हत्याकांड के मामले में मुख्य गवाह था, जिसमें अहमद और अन्य मुख्य आरोपी हैं
Prayagraj Shootout:बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड (BSP MLA Raju Pal murder case) के गवाह उमेश पाल (Umesh Pal Murder Case) की सनसनीखेज हत्या के बाद गैंगस्टर से नेता बना अतीक अहमद (Atique Ahmed) की आपराधिक गतिविधियां एक बार फिर सुर्खियों में है। वह इस समय अहमदाबाद जेल में बंद है। बीते 24 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज थाना अंतर्गत जयतीपुर में उमेश पाल और उसके एक सुरक्षाकर्मी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उमेश पाल BSP विधायक राजू पाल हत्याकांड का मुख्य गवाह था।
हमले में घायल हुए एक अन्य सुरक्षाकर्मी राघवेंद्र सिंह की भी बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हम राघवेंद्र को बचा नहीं पाए। आज उनकी मृत्यु हो गई, जो इसके दोषी है उन्हें जल्द जल्द सज़ा दिलाने का प्रयास जारी है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी समाजवादी पार्टी द्वारा राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए जाने के बाद माफियाओं को नष्ट करने की कसम खाई है।
सोमवार को पुलिस के साथ एनकाउंटर में उमेश पाल हत्याकांड का एक अभियुक्त अरबाज मारा गया। इस एनकाउंटर में धूमनगंज के थाना प्रभारी राजेश मौर्य घायल हो गए, जिनका इलाज एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। इस बीच, प्रयागराज के धूमनगंज थाना अंतर्गत उमेश पाल हत्याकांड के बाद जारी पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई के तहत बुधवार को माफिया अतीक अहमद के करीबी जफर अहमद के घर पर योगी सरकार का बुलडोजर चला दिया गया।
अतिक ने फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने की जताई आशंका
समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व सांसद और गैंगस्टर अतीक अहमद ने अपनी सुरक्षा के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उसने एक याचिका दायर कर दावा किया कि उसे और उसके परिवार को प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड मामले में आरोपियों के रूप में गलत तरीके से शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा जा सकता है।
इस समय अहमदाबाद केंद्रीय जेल में बंद अहमद ने अपनी याचिका में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में दिए गए उस कथित बयान का हवाला दिया कि उसे पूरी तरह से मिट्टी में मिला दिया जाएगा। साथ ही दावा किया कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को जान का वास्तविक और प्रत्यक्ष खतरा है।
उसने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी ट्रांजिट रिमांड मांगेगी। साथ ही उसे अहमदाबाद से प्रयागराज ले जाने के लिए पुलिस रिमांड भी मांगेगी। उसे ऐसी आशंका है कि इस ट्रांजिट अवधि के दौरान फर्जी मुठभेड़ में उसे मार गिराया जाए। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में 61 वर्षीय अहमद ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों से उसके जीवन को खुले और प्रत्यक्ष खतरे से बचाने के लिए उसके जीवन की रक्षा करने के निर्देश केंद्र, उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य को देने का अनुरोध किया है।
अहमद ने उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य को अहमदाबाद की केंद्रीय जेल से प्रयागराज या उत्तर प्रदेश के किसी अन्य हिस्से में उसे नहीं ले जाने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है। उसने अपने वकील को पूछताछ के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति देने और केंद्रीय जेल अहमदाबाद से प्रयागराज ले जाने के लिए किसी भी अदालत द्वारा जारी किए गए वारंट को भी रद्द करने का अनुरोध किया है।
कौन है अतिक अहमद?
अतीक अहमद पर उमेश पाल की हत्या सहित 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह वर्तमान में 2019 से गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती जेल में बंद है। अतीक की आपराधिक कहानी 1979 में तब शुरू हुई जब उसे एक हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया। 10 साल बाद उसने राजनीति में कदम रखा और 1989, 1991 और 1993 में चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। फिर वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर इस सीट से 1996 का चुनाव लड़ा और विजयी हो गया।
1999 में वह अपना दल (AD) में शामिल हो गया, लेकिन प्रतापगढ़ सीट हार गया। हालांकि फिर उसने अपना दल के टिकट पर 2002 के विधानसभा चुनाव में इलाहाबाद पश्चिम सीट जीत ली। इसके बाद 2003 में अतीक सपा के पाले में लौट आया और 2004 में फिर वह फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। यह सीट कभी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पास थी। उसे 2005 में राजू पाल की हत्या में आरोपी के रूप में नामित किया गया था।
2012 के विधानसभा चुनावों में अतीक ने फिर से उसी सीट से अपना दल के साथ अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन बीएसपी की पूजा पाल से 8,885 मतों के अंतर से हार गया। उसने 2014 में सपा के टिकट पर श्रावस्ती से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गया। 2019 में जब वह जेल में बंद था तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया, लेकिन उसे केवल 855 वोट मिले थे।
उमेश पाल कौन है?
उमेश पाल 2005 में बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या का एक मुख्य गवाह था, जिसे 24 फरवरी को दिनदहाड़े प्रयागराज में उनके आवास के बाहर गोली मार दी गई थी। उमेश पाल की पत्नी जया पाल की शिकायत के आधार पर धूमनगंज थाने (प्रयागराज) में अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन, दो बेटों, सहयोगी गुड्डू मुस्लिम, गुलाम और 9 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
इंडिया टुडे ने बताया कि कुख्यात गैंगस्टर अतीक अहमद के इशारे पर उत्तर प्रदेश की बरेली जेल में उमेश पाल की हत्या की साजिश रची गई थी। राजू पाल हत्याकांड में आरोपी अतीक अहमद का भाई अशरफ बरेली जेल में बंद है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 जनवरी 2005 को बीजेपी विधायक राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह रहे उमेश पाल का साल 2006 में अतीक अहमद ने अपहरण करवा लिया था। उमेश पाल का अपहरण करवा कर राजू पाल हत्याकांड में अतीक ने अपने पक्ष में गवाही करवा ली थी। उमेश पाल ने इसी अपरहण मामले में अतीक अहमद पर केस दर्ज करवाया था।
राजू पाल कौन है?
जनवरी 2005 में प्रयागराज में राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले का मुख्य आरोपी अतीक अहमद का भाई अशरफ अहमद था। राजू पाल की विधवा पूजा पाल अब समाजवादी पार्टी की विधायक हैं। राजू ने नवंबर 2004 में अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को हराकर इलाहाबाद (पश्चिम) राज्य विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव जीता। 2005 में गणतंत्र दिवस परेड के लिए अपने गांव जाते समय उनकी हत्या कर दी गई थी।
गैंगस्टर के साथ राजू की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता 2002 से चली आ रही है, जब उसने 2002 के विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद के खिलाफ चुनाव लड़ा था। राजू जीतने में नाकाम रहे, लेकिन 2004 में लोकसभा के चुनाव के बाद अतीक के इस्तीफा देने के बाद उन्हें फिर से सीट से लड़ने का मौका मिला। राजू की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी पूजा पाल अशरफ से सीट हार गईं।