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Ravindra Singh Bhati ने बढ़ाई बीजेपी-कांग्रेस की मुश्किलें, 26 साल की ही उम्र में दे रहे कड़ी टक्कर

Lok Sabha Election 2024 Rajasthan Phase 2: कभी एबीवीपी के कार्यकर्ता थे, अब बीजेपी-कांग्रेस को एक बार करारी शिकस्त देने के बाद फिर मैदान में हैं। पांच साल में ही छात्रसंघ अध्यक्ष, फिर विधायक का चुनाव जीतने के बाद फिर निर्दलीय ही सांसदी के लिए मैदान में हैं। इसके चलते पाकिस्तान की सीमा पर बसे जिले बाड़मेर की लोकसभा सीट पर काफी हलचल दिख रही है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 26, 2024 पर 12:59 PM
Ravindra Singh Bhati ने बढ़ाई बीजेपी-कांग्रेस की मुश्किलें, 26 साल की ही उम्र में दे रहे कड़ी टक्कर
Badmer Lok Sabha constituency: रवींद्र सिंह भाटी ने जिस सीट से दावेदारी पेश की है, वहां करीब 22 लाख वोटर्स हैं।

Lok Sabha Election 2024 Rajasthan Phase 2: पाकिस्तान की सीमा पर बसे जिले बाड़मेर की एक लोकसभा सीट इस समय काफी चर्चा में है। इस सीट पर एक निर्दलीय उम्मीदवार रवींद्र सिंह भाटी ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि बीजेपी की भी हालत पतली कर रखी है। खास बात यह है कि 26 वर्षीय रवींद्र सिंह भाटी ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत बीजेपी के स्टुडेंट विंग एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में की थी और छात्र नेता के रूप में जब अपना कैरियर शुरू किया तो एबीवीपी से जीत छीन ली। अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। उनकी सभाओं और रोडशो में भारी भीड़ उमड़ रही है। रवींद्र ने बाड़मेर संसदीय सीट से केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को सीधे चुनौती दी है। फिलहाल वह बाड़मेर जिले की शिव विधानसभी सीट से निर्दलीय विधायक हैं।

ABVP से सीखा राजनीतिक ककहरा, अब BJP के खिलाफ मैदान में

स्कूल टीचर के बेटे रवींद्र सिंह भाटी ने अपना राजनीतिक कैरियर 2019 में शुरू किया था। उन्होंने एबीवीपी से छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए टिकट मांगा लेकिन एबीवीपी से टिकट नहीं मिलने पर वह निर्दलीय ही मैदान में उतर गए। जोधपुर के जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी के 57 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ था, जब किसी निर्दलीय को छात्रसंघ अध्यक्ष के पद के चुनाव में जीत मिली थी। यह वही यूनिवर्सिटी है, जहां राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी पढ़ाई की है। छात्र राजनीति के बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्यौता दिया लेकिन चीजें तब बदल गई, जब उन्हें विधायक चुनाव के लिए टिकट नहीं मिल। फिर तो रवींद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया और जीत हासिल की। अब एक बार फिर वह निर्दलीय ही संसदीय चुनाव में मैदान में हैं। एरिया के हिसाब से बाड़मेर देश का दूसरा सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र है।

Badmer Lok Sabha constituency में कैसा है माहौल

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