Bajaj Finance Share Price: करीब छह साल पहले 2017-18 में बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) ने क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 4500 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके चलते कंपनी का वैल्यूएशन इसके बुक वैल्यू के मुकाबले उस वित्त वर्ष छह गुने पर पहुंच गई। इसने सालाना आधार 25 फीसदी की ग्रोथ का लक्ष्य किया लेकिन इसने इससे भी कई गुना बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक ऐसा ग्रोथ स्टॉक था जिसे बहुत कम सेल रेटिंग मिली थी। कोरोना महामारी के दौर की बात छोड़कर इसका दावा अभी भी एयूएम (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) में सालाना 25 फीसदी का ग्रोथ का है और यह अभी भी बुक वैल्यू के मुकाबले छह गुने वैल्यू पर है। हालांकि शेयरों को लेकर आज की बात करें तो पिछले एक साल में यह करीब 20 फीसदी कमजोर हुआ है और कम से कम सात ब्रोकरेज ने इसे सेल रेटिंग दी है।
हालांकि 23 ब्रोकरेज ने इसे अभी भी खरीदारी की रेटिंग दी हुई है। पिछले साल 2022 में तो यह यह चौदह साल में पहली बार निफ्टी के मुकाबले फीका रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि बजाज फाइनेंस में यह कमजोर थोड़े समय के लिए ही है या अब इसका पुराना दौर फिर नहीं आने वाला है?
ब्रोकरेज का क्या कहना है?
इनवेस्टेक सिक्योरिटीज ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बजाज फाइनेंस की दिक्कतें गिनाई हैं और इसमें सबसे अहम यह है कि एक्टिव कस्टमर्स के मामले में इसकी बाजार हिस्सेदारी ऐसे लेवल पर पहुंच चुकी है कि अब यहां से आगे इसकी ग्रोथ सुस्त रहेगी। ब्रोकरेज के मुताबिक यह यह शेयर भी काफी महंगा है। ब्रोकरेज के मुताबिक बैंक अनसिक्योर्ड लेंडिंग में तेजी से पैर पसार रहा है जिसके चलते इस सेगमेंट में बजाज फाइनेंस को तगड़ी टक्कर मिल रही है। यह टक्कर नई नहीं है लेकिन महामारी के बाद स्थितियां बदल गई हैं और बैंक तेजी से इस सेगमेंट में आगे बढ़ रहे हैं तो बजाज फाइनेंस की दिक्कतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा मैनेजमेंट और बैंकिंग लाइसेंस से जुड़े कुछ मामलों ने भी निवेशकों की चिंताई बढ़ाई हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर मैनेजमेंट संकेत दे चुका है कि ग्रोथ और मार्जिन के बीच यह मार्जिन ही चुनेगी।
बजाज फाइनेंस को सेल रेटिंग देने वाले एक ब्रोकरेज एंबिट कैपिटल का मानना है कि इसका वैल्यूएशन कंपनी के लक्ष्य के हिसाब से नहीं है। एंबिट के मुताबिक इसका लोन बुक आने वाले समय में 20 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ेगा जबकि इतनी ही ग्रोथ निजी सेक्टर के बैंक में दिख सकती है और यह सस्ता भी पड़ेगा। कुल मिलाकर बजाज फाइनेंस में निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए कम हो रही है क्योंकि बैंकों का वित्तीय सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है।
बैंकों के साथ क्या है पॉजिटिव
सुस्त ग्रोथ और कमजोर प्रॉफिटेबिलिटी से अब बैंक उबर चुके हैं और उनका कैपिटल बेस मजबूत हो चुका है। क्रेडिट रिस्क से ये अब काफी सुरक्षित हो चुके हैं और कॉरपोरेट एनवॉयरमेंट भी अच्छा है जिसके चलते ग्रोथ की गुंजाइश काफी अधिक है। तीन साल पहले एकल अंकों की ग्रोथ के मुकाबले बैंकिंग सेक्टर का लोन ग्रोथ 16 फीसदी की दर से बढ़ा है। इसके चलते निवेशक बजाज फाइनेंस के मुकाबले एचडीएफसी बैंक, जिसकी वैल्यू वित्त वर्ष 2024 के अनुमानित बुक वैल्यू के मुकाबले तीन गुना और कोटक महिंद्रा बैंक, जिसकी वैल्यू वित्त वर्ष 2024 के अनुमानित बुक वैल्यू के मुकाबले 2.8 गुना पर है, उन पर दांव लगा रहे हैं। वहीं बजाज फाइनेंस की वैल्यू वित्त वर्ष 2024 के अनुमानित बुक वैल्यू के मुकाबले छह गुने पर है यानी महंगा है।
बढ़ती ब्याज दरों के दौर और सस्ते पब्लिक डिपॉजिट्स के चलते बैंक हर रुपये पर अच्छा पैसा कमा सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस को बैंकों और बाजारों से उधार लेते समय आक्रामक तरीके से ब्याज से निपट सकता है लेकिन मार्जिन के मामले में यह लगातार बैंकों से नहीं निपट सकता है।
तो Bajaj Finance को बैंक बन जाना चाहिए?
जब बैंकों के लिए माहौल अच्छा तैयार हो रहा है तो क्या बजाज फाइनेंस बैंक बन जाए तो दिक्कत सुलझ जाएगी? इसे लेकर प्रभुदास लीलाधर के एक एनालिस्ट अक्षय अशोक का कहना है कि इससे बजाज फाइनेंस को और झटका लग सकता है क्योंकि तब इस पर निगरानी और बढ़ जाएगी। इसे कैश रिजर्व रेश्यो जैसी नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा जिससे शॉर्ट टर्म में इसकी कमाई पर असर पड़ेगा। हालांकि मैनेजमेंट ने भी संकेत दे दिया है कि बैंक बनना फिलहाल इसके सक्रिय प्लान में नहीं है।
सिर्फ बैंकों ने ही नहीं बढ़ाई है दिक्कतें
बैंक पहले कॉरपोरेट लोन पर फोकस करते थे तो बजाज फाइनेंस मजबूत स्थिति में थी लेकिन अब ये रिटेल लोन पर भी फोकस कर रहे हैं तो बजाज फाइनेंस को लेकर एनालिस्ट्स निगेटिव दिख रहे हैं। हालांकि सिर्फ बैंकों की तरफ से ही नहीं बल्कि बड़े कॉरपोरेट ग्रुप ने भी इसकी चुनौतियां बढ़ाई हैं। पिछले साल नवंबर 2022 में रिलायंस ने अपने फाइनेंशियल कारोबार को अलग करने का ऐलान किया था जिसे मैक्वॉयरी कैपिटल के एनालिस्ट्स इस सेगमेंट की कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती मान रहे हैं। मैक्वॉयरी कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक अभी जियो फाइनेंशियल के कस्टमर सेगमेंट्स और टारगेट मार्केट्स पर सटीक कुछ कहना कठिन है लेकिन यह स्पष्ट है कि इसका फोकस कंज्यूमर और मर्चेंट लेंडिंग पर रहेगा जो बजाज फाइनेंस और पेटीएम जैसी दिग्गज कंपनियों का मुख्य ठिकाना है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।