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Share Market Crash: Sensex इंट्रा-डे हाई से टूटा 900 प्वाइंट्स, 5 वजहों से Nifty भी आया 23600 के करीब

Stock Market Crash: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज की शुरुआत शानदार रही और चौतरफा रौनक दिखी। हालांकि फिर दो घंटे के भीतर ही सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) लाल हो गए। दो अहम सेक्टर्स ने मार्केट पर अच्छा दबाव बनाया। जानिए मार्केट के लाल होने की पांच अहम वजह

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 21, 2026 पर 4:01 PM
Share Market Crash: Sensex इंट्रा-डे हाई से टूटा 900 प्वाइंट्स, 5 वजहों से Nifty भी आया 23600 के करीब
Sensex-Nifty Slips: शुरूआती तेजी गंवाते हुए कारोबार शुरू होने के दो ही घंटे में सेंसेक्स और निफ्टी लाल हो गए।

Share Market Crash: शुरुआती बढ़त को गंवाते हुए मार्केट खुलने के करीब दो ही घंटे में मार्केट लाल हो गया। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) पूरी तेजी गंवाते हुए रेड जोन में आ गए। यहां से रिकवरी के बाद यह फिर फिसला और रेड हो गया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 627.4 प्वाइंट्स चढ़कर 75,945.79 पर पहुंच गया था लेकिन फिर इस इंट्रा-डे हाई से 949.01 प्वाइंट्स टूटकर 74,996.78 तक आ गया। वहीं निफ्टी की बात करें तो शुरुआती कारोबार में यह 200.9 प्वाइंट्स चढ़कर 23,859.90 तक पहुंचा था जिससे यह 264.30 प्वाइंट्स गिरकर 23,596.60 तक आ गया। दिन के आखिरी में आज सेंसेक्स 135.03 प्वाइंट्स यानी 0.18% की फिसलन के साथ 75,183.36 और निफ्टी 4.30 प्वाइंट्स यानी 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 23,654.70 पर बंद हुआ है।

Why Market Slips: इन वजहों से मार्केट लाल

RBI का ब्याज दरें महंगी करने पर विचार

रुपये की गिरावट को थामने के लिए सभी विकल्पों पर आरबीआई गौर कर रहा है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई इसे लेकर ब्याज दरों में बढ़ोतरी, करेंसी के अतिरिक्त स्वैप और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने के विकल्पों पर गौर कर रहा है। इस हफ्ते एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये के फिसलकर ₹97 के काफी करीब आने के आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत आरबीआई के टॉप अधिकारी अंदरूनी तौर पर कई बैठकें कर रहे हैं। मौद्रिक नीतियों का अगला ऐलान 5 जून को होना है। बता दें कि ब्याज दरों में उछाल का इक्विटी मार्केट पर निगेटिव असर पड़ता है क्योंकि कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ जाती है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हो जाता है। इसके अलावा लिक्विडिटी कम होने से शेयरों की तुलना में फिक्स्ड इनकम वाले निवेश अधिक आकर्षक हो जाते हैं।

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