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Markets में रिकवरी, लेकिन अपर सर्किट के मुकाबले ज्यादा शेयरों में लोअर सर्किट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रूस और यूक्रेन में बढ़ते टेंशन और ऑयल की बढ़ती कीमतों के चलते स्टॉक मार्केट्स के लिए अब भी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। दरअसल, इंडिया जैसे देश के लिए ऑयल की ऊंची कीमतें चिंता की बात है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 25, 2022 पर 5:01 PM
Markets में रिकवरी, लेकिन अपर सर्किट के मुकाबले ज्यादा शेयरों में लोअर सर्किट
शुक्रवार को तेजी के बावजूद बीएसई में करीब 300 शेयरों में लोअर सर्किट लगा। इसके मुकाबले सिर्फ 250 शेयरों में अपर सर्किट लगा।

स्टॉक मार्केट्स (Stock Markets) में शुक्रवार को शानदार रिकवरी आई। सेंसेक्स (Sensex) 1300 अंक चढ़ गया। इससे पहले गुरुवार को यूक्रेन पर रूस के हमले से स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई थी। इससे इनवेस्टर्स के 13.14 लाख करोड़ डूब गए थे। शुक्रवार को जबर्दस्त तेजी के बावजूद मार्केट में अपर सर्किट के मुकाबले लोअर सर्किट वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही।

शुक्रवार को बाजार में चौतरफा रिकवरी आई। इससे निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांक करीब 4-4 फीसदी से ज्यादा चढ़कर बंद हुए। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, मेटल, फार्मा, ऑटो और रियल्टी सूचकांकों में 2 से 5 फीसदी तेजी आई।

तेजी के बावजूद बीएसई में करीब 300 शेयरों में लोअर सर्किट लगा। इसके मुकाबले सिर्फ 250 शेयरों में अपर सर्किट लगा। लोअर सर्किट वाले ज्यादातर शेयर बी ग्रुप के हैं। आम तौर पर ए ग्रुप के शेयरों में लिक्विडिटी ज्यादा होती है। इनमें नॉर्मल रोलिंग सेटलमेंट प्रोसेस के तहत ट्रेडिंग होती है। बी ग्रुप के शेयर भी नार्मल रोलिंग सेटलमेंट प्रोसेस में आते हैं, लेकिन इनकी रैंकिंग ए ग्रुप से नीचे होती है। टी ग्रुप के शेयर इंट्रा-डे ट्रेंडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं।

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