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ITR Filing के लिए 15 जून तक इंतजार करें सैलरीड टैक्सपेयर्स, जल्दी की तो आ सकता है नोटिस

ITR Filing: आईटीआर फाइलिंग के लिए सभी जरूरी फॉर्म जारी किए जा चुके हैं तो साथ ही अपडेटेड फॉर्म भी आ चुका है। हालांकि इनके जारी होने का मतलब ये नहीं है कि तुरंत ही आईटीआर फाइल कर दें क्योंकि 15 जून से पहले अगर सैलरीड टैक्सपेयर्स इसे फाइल कर देते हैं तो उन्हें टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस तक आ सकता है। जानिए ऐसा क्यों और 15 जून तक का इंतजार क्यों करना चाहिए

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 20, 2026 पर 11:12 AM
ITR Filing के लिए 15 जून तक इंतजार करें सैलरीड टैक्सपेयर्स, जल्दी की तो आ सकता है नोटिस
ITR Filing: अधिकतर सैलरीड टैक्सपेयर्स को टैक्स फाइलिंग में फॉर्म 16, फॉर्म 16ए, फॉर्म 26एएस या AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) लगाना होता है।

ITR Filing: अधिकतर टैक्सपेयर्स का मानना है कि अपने रिटर्न को जल्द से जल्द फाइल करना फायदेमंद है लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक बहुत जल्दी फाइल करना भी कुछ मामलों में नुकसान पहुंचा सकता है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस भी मिल सकता है। यह सावधानी खासतौर से सैलरीड इंडिविजुअल्स को बरतनी चाहिए और उन्हें 15 जून के बाद ही आईटीआर फाइल करने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि इसे 31 जुलाई यानी आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन से पहले फाइल कर लेना चाहिए ताकि जुर्माने से बचा सके तो आखिरी समय की परेशानियों और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए डेडलाइन से एक हफ्ते पहले तक इसे फाइल कर लेना चाहिए।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले वित्त वर्ष 2026 यानी एसेसमेंट वर्ष 2027 के लिए आईटीआर-1 से लेकर आईटीआर-7 तक सभी फॉर्म और अपडेटेड रिटर्न फॉर्म ITR-U नोटिफाई कर दिए हैं यानी जारी कर दिए हैं। ये फॉर्म पिछले हफ्ते जारी हुए। साथ ही आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म्स के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी जारी हो गई है, जिससे टैक्सपेयर्स ऑफलाइन एक्सेल आधारित यूटिलिटी के जरिए रिटर्न तैयार कर सकते हैं और बाद में उसे ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं।

15 जून तक क्यों करना चाहिए इंतजार सैलरीड टैक्सपेयर्स को?

अधिकतर सैलरीड टैक्सपेयर्स को टैक्स फाइलिंग में फॉर्म 16, फॉर्म 16ए, फॉर्म 26एएस या AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) लगाना होता है। इनमें वित्तीय लेन-देन, TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स), सेविंग्स बैंक अकाउंट के ब्याज, प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शंस, जीएसटी सेल्स, पर्चेजेज और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शंस के आंकड़े होते हैं। बैंक और एंप्लॉयर्स के साथ-साथ एएमसी, म्यूचुअल फंड हाउसेज और ब्रोकर्स समेत अन्य रिपोर्टिंग एंटिटीज को 31 मई तक इन डॉक्यूमेंट्स को पूरा करना होता है जिसके बाद एआईएस में यह सात से दस दिन में दिखने लगता है। ऐसे में अगर 15 जून से पहले आईटीआर फाइल कर देते हैं तो ऐसा हो सकता है कि डॉक्यूमेंट्स में लेटेस्ट डेटा न हो और टैक्स डिपार्टमेंट से मिसमैच नोटिस मिल सकता है। टैक्सपेयर्स के पास 31 दिसंबर 2026 तक डिटेल्स सही करने या लेट रिटर्न फाइल करने का विकल्प होता है लेकिन टैक्सपेयर्स की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

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