Chitragupta Puja 2025: चित्रगुप्त पूजा साल में दो बार मनाई जाती है। एक बार होली के बाद हिंदू माह चैत्र में और फिर दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को। कार्तिक मास की चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि माना जाता है कि भगवान चित्रगुप्त इसी दिन प्रकट हुए थे। कायस्थ समाज के इष्टदेव भगवान चित्रगुप्त संसार के सभी प्राणियों का लेखा-जोखा रखते हैं और उन्हें कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। कायस्थ समाज के लोग कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि का बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। इस पूजा के साथ एक परंपरा जुड़ी है, जिसके तहत ये लोग दीपावली की रात को अपनी कलम बंद कर देते हैं और फिर पूरे 24 घंटे के बाद यानी दूज के दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा करने के बाद ही कामकाज शुरू करते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक और रोचक कारण है, जिसके प्रतीक स्वरूप ये परंपरा चली आ रही है। आइए जानें इसके बारे में
